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दशहरा महोत्सव बुराई का अंत का प्रतीक रावण दहन अहंकार का दहन है - डॉ. चोलेश्वर चंद्राकर


 डेरागढ़-रावण बुद्धिमान होने के बाद भी अपने अहंकार में वशीभूत होकर पाप के रास्ते पर चल पड़ा था  जिसके कारण उनका वध हुआ । बुराई के अंत प्रतीक के रूप में रावण दहन के माध्यम से दशहरा महोत्सव पूरे देश में मनाया जाता है हमें बुराई का त्याग कर अच्छाई को आत्मसात करना चाहिए। दशहरा महोत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है अहंकार के दहन का महोत्सव है दशहरा। उक्त बातें अपने मुख्य  अतिथि की आसंदी से सक्ति क्षेत्र के ग्राम डेरागढ़ में आयोजित दशहरा महोत्सव मेला रावण दहन आयोजन में शामिल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ चौलेश्वर चंद्राकर ने व्यक्त किया अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए डा चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार ने सभी क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं किसानों के 25 सौ रू से अधिक समर्थन मूल्य में धान खरीद कर उन्हें खुशहाल बना दिया है

बिजली बिल हाफ, कर्जा माफ चिटफंड की राशि वापस कराने का प्रयास आदि ऐसे अनेकों योजनाएं भूपेश सरकार की संचालित है जिसने हर एक चेहरे पर खुशी ला दी है। श्री  चंद्राकर ने कहा कि जिला जांजगीर चांपा से अलग सक्ति जिले का निर्माण सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है अब जन जन का बुनियादी रूप से विकास होगा इसके लिए भूपेश सरकार को जनता ने आभार  धनयवाद किया है। श्री चंद्राकर ने कहा कि हमारी धर्म संस्कृति हमें यह सिखाती है कि एक रहे नेक रहे सभी के चेहरे पर खुशी हो और सबका विकास हो इन्हीं भावनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार जनहित में कार्य संचालित कर रही है। श्री चंदाकर ने डेरागढ़ में होने वाले दशहरा महोत्सव का बखान करते हुए आयोजन समिति की प्रशंसा की और आने वाले समय में इस आयोजन को और भी रचनात्मक सांस्कृतिक भव्य रूप प्रदान किए जाने की दिशा में प्रयास करने की बात कही इससे पूर्व मुख्य अतिथि डॉ चंद्राकर का आयोजन समिति के सदस्यों ने पुष्प  माल्यार्पण एवं गाजे बाजे के साथ स्वागत किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में अनिल नत्थू राम चंद्रा, गीता साहू कार्यकर्ताओं सहित हजारों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे

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