मध्य प्रदेश उपचुनाव के बीच में बीजेपी का दामन थामने वाले कांग्रेस विधायक सचिन बिरला की विधायकी को लेकर असमंजस खड़ा हो गया है। बिरला के बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दलबदल नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को अनुरोध किया था, लेकिन अब कांग्रेस ने अब नया आवेदन देकर कहा है कि बिरला को लेकर फिलहाल एक्शन नहीं लिया जाए, क्योंकि पहले दिए गए पत्र में कुछ कमियां हैं। इसे लेकर नया आवेदन दिया जाएगा।
विधानसभा सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की तरफ पत्र पूर्व मंत्री डाॅ. गोविंद सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को दिया है। इसके बाद राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा शुरू हो गई कि बिरला वापस कांग्रेस में आने वाले हैं। हालांकि बिरला ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए इसका खंडन किया है। उन्होंने देर शाम कहा कि मैं बीजेपी में शामिल हो चुका हूं। अब कांग्रेस की वापसी नहीं करूंगा।
बड़वाह के विधायक सचिन बिरला खंडवा लोकसभा सीट के लिए 30 अक्टूबर को हुई वोटिंग से करीब एक सप्ताह पहले कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे। बीजेपी में शामिल होने के कुछ घंटे पहले तक वे कांग्रेस प्रत्यशी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। उनके पाला बदलने से उनके निकट सहयोगी भी भौचक्के रह गए थे। बिरला ने खंडवा में एक सभा में खुद खुलासा किया कि ये सब कैसे हुआ?
बिरला ने बताई थी पूरी कहानी
बिरला ने बताया था कि 23 अक्टूबर को देर शाम तक वे कांग्रेस के लिए सभा कर रहे थे। रात को करीब 10.30 बजे सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें फोन कर बीजेपी ज्वॉइन करने का आमंत्रण दिया। सीएम ने कहा कि बेटा आप बीजेपी में आना चाहें तो दरवाजे खुले हैं। बिरला को सीएम ने सुबह 9.30 बजे तक सोचने का समय दिया और इसके बाद फोन करने की बात कही।
बिरला ने यह भी कहा कि वे विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का हिस्सा बनकर खुश हैं। उन्हें बीजेपी की रीति-नीति समझने में थोड़ा वक्त लग रहा है, लेकिन अपनी अंतिम सांस तक उन्होंने पार्टी में बने रहने का भरोसा भी दिया।
3 नवंबर को उपचुनाव के आए नतीजों में बीजेपी की जीत हुई और इसमें गुर्जर वोटों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। सचिन बिरला का इस समुदाय पर खासा प्रभाव है। बीजेपी ने खंडवा लोकसभा के अलावा पृथ्वीपुर और जोबट विधानसभा सीट भी जीत ली, जबकि कांग्रेस को केवल रैगांव विधानसभा सीट से संतोष करना पड़ा।
0 टिप्पणियाँ