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प्रशासन के दोगलेपन का परिणाम: गायें भूखों मरने के लिये मजबूर

जब भी हो अंतिम समय,करिये गैया दान

हमको ये समझा रहे,अपने वेद पुराण!

चम्बल संभाग मुख्यालय मुरैना से मात्र 5 किमी दूर नगर पालिक निगम मुरैना द्वारा संचालित देवरी गौशाला अब गायों की मौतशाला में तब्दील होती जा रही है!आलम यह है कि गत चार दिन पहले अचानक हुई बारीश के उपरांत जो सैकड़ों गायों के मरने का सिलसिला शुरु हुआ था वो बारीश जब भी हो अंतिम समय,करिये गैया दान हमको ये समझा रहे,अपने वेद पुराण! के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है! इसके पीछे जो कारण ऊभर कर सामने आये हैं उसमें मुख्य हैं गऊ सेवा और देखरेख के नाम पर निगम द्वारा तैनात किये गये मस्टर कर्मी व भ्रष्ट निगम अधिकारीयों का गठजोड़! जो गायों की सुरक्षा के नाम पर संगठित खुली लूट और वास्तविक गऊ सेवकों के सम्मान के साथ खुलेआम किया गया खिलबाड़ है!गायों के अच्छे स्वास्थ और बेहतर खानपान के लिये शासन और निगम से मिलने वाले प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये के फण्ड को वाकायदा मिलजुल कर बंदरवांट किया जा रहा है नतिजन सैकड़ों गऊ माता भूख और पानी न मिलने के कारण दम तोड़ने के लिये मजबूर हैं!उल्लेखनिय है कि आज से 10 वर्ष पूर्व बड़ी संख्या में मुरैना के रास्ते उत्तरप्रदेश के तमाम अवैध बूचड़खानों में ट्रकों में भरकर ले जाने वाली सैकड़ों गायों को बचाने के लिये मंहत हरीओम पुरी ने कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्थानीय पुराने बस स्टैण्ड की खाली पड़ी भूमि पर उक्त  गौशाला की स्थापना की थी! देखते-देखते हरीओम पुरी और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रात-रात भर जाग कर उत्तरप्रदेश को जाने वाले मुरैना के विभिन्न राजमार्ग पर चोकसी करते हुये चोरी-छिपे गायों को ले जा रहे ट्रकों को मय तश्करों के पुलिस की मदद से पकड़ा गया! कुछ ही दिनों में हालात ये हो गये कि एक तरफ जहां सैकड़ों की तादाद में गौशाला में लाचार,बूड़ी और अपाहिज बीमार गायों की उपस्थिति हो गई वहीं तश्करों ने अपने ऊपर लदते पुलिस मामले और हिंदू संगठनों की सजगता के कारण मुरैना के रास्ते गाय तश्करी से तौबा कर ली! अब सवाल ये खड़ा हुआ कि गौशाला में बड़ी संख्या में मोजूद लाचार,अपाहिज बीमार व बूढ़ी गायें जो दूध देने में अक्षम थीं, के चारे-पानी की व्यवस्था कैसे की जाये? इसके लिये मुरैना शहर के गाय प्रेमी और आम श्रद्धालुओं से चंदा,व पीने-चारा सामग्री  इत्यादि की अपील की गई! पूरी गौशाला कि टीम इस काम में जुट गई परिणाम भी सामने आये, शहर की कई दुकानदार ऐशोसिशनों ने गायों के खाने-पीने में भरपूर मदद की! इसी बीच शहर में आवारा घूम रहे गोवंश को भी यहां गौशाला में रखने के आदेश जिला क्लेक्टर ने दे दिये!इसके साथ ही कुछ जिम्मेदारी खर्चों की नगर निगम पर भी स्थानांतरित की गई और स्थाई गौशाला के लिये मंहत हरीओम पुरी और गायों की उचित देखरेख के लिये बनी दानदाताओं व समाजसेवियों की कमेटी के आग्रह पर स्थाई रुप से उक्त देवरी की 10 बीघा जमीन भी गौशाला को दे दी गई जहां अभी गौशाला स्थित है!


शानदार तरीके से जनमानश के सहयोग से चल रही देवरी गौशाला में दुःखद मोढ़ आज से दो वर्ष पूर्व जब आया तब कांग्रेस की प्रदेश सरकार रहते कुछ दर्जन गायें उचित ईलाज और चिकित्सकिय अभाव में मर गई ! बस फिर क्या था हंगामा खड़ा हो गया चारो तरफ अफवाह और भ्रष्टाचार के नारे बुलंद हो गये मुरैना से लेकर भोपाल तक जिम्बेदार अधिकारियों में हड़कम्प मच गया! अफरा-तफरी के माहौल में खुद को बचाने के लिये गायों के ईलाज के लिये तैनात तात्कालीन डिप्टी डायरेक्टर पशु चिकित्सा डा़ एस शर्मा ने मंहत हरीओम पुरी सहित दानदाता व शहर के ख्याति प्राप्त समाजसेवियों की पूरी  गौशाला कमेटी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा दी! इससे मामला और बिगड़ गया और पूरा शहर अधिकारी व सरकार के खिलाफ उठ खड़ा हुआ! बहरहाल डा़ शर्मा ने भारी दबाव के कारण एफआईआर तो वापिस ले ली मगर वे गऊओं के प्रति समर्पित दानदाताओं और समाजसेवियों का विश्वास खो चुके थे! अब सैकड़ों गायों की अकाल मौत पर एक सवाल के जबाव में निगम आयुक्त संदीप जैन ने चारा-भुस की कमी को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर बाजार से सहयोग नहीं मिला तो हालात और बदतर हो सकते हैं! हालांकि वे ये कहकर अपनी जिम्बेदारी से भागने का प्रयास ही कर रहे हैं? क्योंकि सवाल उठता है कि बाजार के सहयोग के लिये बाजार के पास जायेगा कोन? पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद से ही समाजसेवी और दानदाता अभी तक भयभीत हैं और वे गौशाला जाने तक के नाम सिहर जाते हैं! यहां ये भी उल्लेखनीय है कि गायों के लिये गुड़,भूसा,पीना,नमक हरा चारा का इंतजाम काफी हद तक ये समाजसेवी दानदाता खुद और अपने प्रयासों से करते थे व अपने-अपने कारोबार में से समय निकाल कर नियमित अपने सामने गायों को भरपेट चारा खिलवाते थे!यदि आज सैकड़ों  गाय अकाल मौत मर रही हैं तो यह प्रशासन के दोगलेपन का ही परिणाम है कि खुद भ्रष्टाचार में डूब कर कुछ करना नहीं और घटना घट गई तो सच्चे गौ सेवकों के ही खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज!यदि वास्तव में निगम आयुक्त श्री जैन सैकड़ों गायों की अकाल और असमय मौत को रोकना चाहते हैं तो स्वयं प्रयास करें और दानदाताओं व समाजसेवियों से मिलकर उन्हें  को आसस्वत करें कि गायों की सेवा करने पर उन्हे किसी प्रकार के कानूनी मामलातों का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे गऊ सेवा के महत्व को खुद भी समझें और दानदाताओं को समझायें कि

                                                  श्रीगोपाल गुप्ता

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