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Anti : शास्त्री ने कहा जीवन में ऐसे मोड़ भी आते हैं जिनका हमें अंदेशा नहीं, इनसे लड़ने तैयार रहें

जीवन में ऐसी मोड़ आते हैं जिनका हमें अंदेशा भी नहीं होता है। हमें हर बुराई से लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि मनुष्य रूप में जन्म लेना सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह बात भागवताचार्य पं राकेश शास्त्री ने कही। आचार्य पं. शास्त्री, मंगलवार को बाग वाली माता के मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।

वामन अवतार एवं प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राजा बलि को यह अभिमान था कि उसके बराबर एवं समर्थ इस संसार में कोई नहीं है। भगवान ने राजा बलि का अभिमान चूर करने के लिए वामन का रूप धारण किया। भिक्षा मांगने राजा बलि के पास पहुंच गए। अभिमान से चूर राजा ने वामन को उसकी इच्छा अनुसार दक्षिणा देने का वचन दिया।

वामन रूपी भगवान ने राजा से दान में तीन पग भूमि मांगी। राजा वामन का छोटा स्वरूप देख हंसा और तीन पग धरती नापने को कहा। इसके बाद भगवान ने विराट रूप धारण कर एक पग में धरती-आकाश और दूसरे पग में पाताल नाप लिया। और राजा से अपना तीसरा पग रखने के लिए स्थान मांगा। भगवान का विराट रूप देखकर राजा का घमंड टूट गया और वह दोनों हाथ जोड़कर प्रभु के आगे नतमस्तक होकर बैठ गया।

राजा ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने की प्रार्थना की। वहीं बानमोर के पवाया में चल रही भागवत कथा में मंगलवार को पं.दाऊ दयाल शास्त्री ने कहा कि ब्रज में भगवान इंद्र की पूजा करने के लिए नंद बाबा के घर व गांव में खूब पकवान बनाए जा रहे थे

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