रात 8 बजे से होगी मटकी फोड़ प्रतियोगिता, विजेता को मिलेगा 5100 रूपए का ईनाम
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शिवपुरी। प्रदेश सरकार की वरिष्ठ मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से जिस प्राचीन कालियामर्दन मंदिर का भव्य जीर्णोद्वार हुआ है। उसमें विभिन्न त्यौहारों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कालियामर्दन मंदिर में कल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व जन्माष्टमी का त्यौहार परम्परागत उत्साह, उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाएगा। कालियमर्दन मंदिर पर सुंदर और आकर्षक लाईट की व्यवस्था की जा रही है तथा मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर्व पर मंदिर प्रांगण में 19 अगस्त को रात्रि 8 बजे मटकी फोड प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। जिसमें विजेता को 5100 रूपए का पुरूष्कार मिलेगा। इस अवसर पर अतिथि के रूप में विशेष रूप से नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमति गायत्री शर्मा और भाजपा जिलाध्यक्ष राजू बाथम उपस्थित रहेंगे।
कालियामर्दन मंदिर समिति से जुडे समाजसेवी तेजमल सांखला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जन्माष्टमी पर्व पर कालियामर्दन मंदिर में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें भजन पूजन, कीर्तिन और भंडारे का आयोजन शामिल है। श्री सांखला ने समस्य धर्माबलंबियों से अपील की है कि 19 अगस्त को वे शाम साढ़े 7 बजे कालियामर्दन मंदिर पर पहुंचकर धार्मिक आयोजनों में भाग लें और प्रसाद का लाभ उठाएं। रात 8 बजे से मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
जिसमें सीखने की ललक होती है सफलता वहीं प्राप्त कर पाता है : बाल मुनि
जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने बताया कि इंसान वहीं होता है जो अपनी गलती से सीखता है
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शिवपुरी। अपने जीवन को सफल और सार्थक वहीं व्यक्ति बना सकता है, जिसमें सीखने की ललक विधमान होती है। जो अपने आप को पूर्ण नहीं मानता और हर व्यक्ति, हर वस्तु, हर चीज और हर झटके यहां तक कि छोटे से बच्चे से भी कुछ न कुछ सीखता रहता है। गलती करना स्वभाव है। लेकिन बार-बार एक ही गलती नहीं करना चाहिए। गलती से जो सीखता है, वहीं इंसान कहलाने का हकदार है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में आचार्य कुलचंद्र सूरि जी महाराज साहब ने उपस्थित श्रोताओं को मांगलिक पाठ का श्रावण कराया।
संत कुलदर्शन विजय जी ने अपने उदबोधन में इस भ्रांति का निवारण किया कि धर्म या आध्यात्म परलोक की बात करता है। उसका वर्तमान जीवन से कोई संबंध नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि धर्म वर्तमान जीवन को सुंदर और स्वर्ग बनाता है। जीते जी जीवन को स्वर्ग बनाने की सामर्थय धर्म में है। धर्म करने से मोक्ष मिलेगा या नहीं यह स्पष्ट नहीं है। परलोक सुधरेगा या नहीं यह भी साफ नहीं है। लेकिन धर्म से वर्तमान जीवन अवश्य स्वर्ग बनेगा और जब वर्तमान जीवन स्वर्ग बन जाएगा तो मृत्यु भी सुधरेगी। परलोक भी सुधरेगा और मोक्ष भी मिलेगा। अपने जीवन को कैसे बेहतर बनाया जाए। इसके लिए महाराज श्री ने 4 सूत्र दिए। उन्होंने पहले सूत्र लर्निंग टाईम (सीखने का समस) की व्याख्या करते हुए कहा कि हमें अपने आप को पारंगत नहीं मानना चाहिए और प्रत्येक से कुछ न कुछ सीखना चाहिए। चाहें तो हम सूर्य से समय बद्धता, चंद्रमा से शीतलता और समाधि, हवा से जीवन के अस्थिरता का बोध सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति हारता नहीं है, बल्कि या तो वह जीतता है या फिर सीखता है। हारता वहीं है जिसने हार को स्वीकार कर लिया है। जीवन को बेहतर बनाने के दूसरे सूत्र अर्निंग टाईम (कमाने का समय) की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हमें जीवनकाल में पुण्य, सदबुद्धि और प्रसन्नता की कमाई पर ध्यान देना चाहिए। पुण्य से जीवन चलता है और सदबुद्धि से जीवन बेहतर बनता है। तीसरे सूत्र रर्निंग टाईम (दौडऩे का समय) का विशलेषण करते हुए पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी महाराज साहब ने बताया कि जीवन का भरोसा नहीं है, कब जीवन की बत्ती बुझ जाए। इसलिए हर समय का उपयोग करना चाहिए। कोई भी काम कल पर नहीं टालना चाहिए। आज 5 दिन के क्रिकेट का जमाना नहीं। बल्कि 20-20 का जमाना है। काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय होगी, बहुरी करेगा कब। अंतिम सूत्र टर्निंग टाईम (दिशा देने वाला समय) की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान यदि अपने जीवन पर दृष्टिपात करे तो उसे देखना चाहिए कि क्या उसका जीवन ठीक दिशा में चल रहा है और यदि नहीं तो उसे अपने जीवन को एक नई दिशा देनी चाहिए। धर्म से भले ही मोक्ष, सदगति और समाधि मरण न हो। लेकिन धर्म जीवन को प्रसन्नता देने का काम अवश्य करता है और जिसके जीवन में प्रसन्नता का नाद हुआ तो उसे मोक्ष, सदगति और समाधि भी मिलेगी।
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साध्वी भीम नंदिता श्रीजी के 30 उपवास पूर्ण
आचार्य कुलचंद्र सूरि जी महाराज के सानिध्य में शिवपुरी जैन समाज में धर्म की पावन गंगा प्रवाहित हो रही है। व्रत, उपवास, तपस्या आदि धार्मिक क्रियाओं की प्रभावना हो रही है। इसी कड़ी में जैन साध्वी भीम नंदिता श्री जी महाराज साहब का आज 30वां उपवास है। कल उनका 31वां उपवास होगा और 20 अगस्त को उनके पारणे का कार्यक्रम है। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा नगर से निकाली जाएगी।


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