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MP : पार्टी के बाद बहे तहसीलदार अब तक नहीं मिले

पुल से 12 किमी दूर मिला कार वाले पटवारी का शव मिला

 15 अगस्त काे पटवारी के साथ नदी में बहे तहसीलदार‎ नरेंद्र सिंह ठाकुर का अब तक पता नहीं चल सका। पटवारी का शव बुधवार को सीहोर की सीवन नदी के करबला पुल से करीब 12‎ किमी दूर छापरी के पास मिला‎।‎ सीवन नदी पर टीम घटनास्थल से करीब 25 किमी तक सर्चिंग कर चुकी है। तहसीलदार नरेन्द्र सिंह ठाकुर की तलाश 150 अधिकारी-कर्मचारियाें की 4 टीमें कर रही हैं। गुरुवार को भी उनकी सर्चिंग जारी रही। NDRF की 30 सदस्यों की टीम रायसेन से सीहोर आ गई है। दैनिक भास्कर की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची...

15 अगस्त की शाम तहसीलदार नरेंद्र सिंह ठाकुर (45), पटवारी महेंद्र सिंह रजक (33), महेंद्र शर्मा और राहुल आर्य ने दोस्त तरुण सिंह के फॉर्म हाउस में पार्टी करने का प्लान बनाया था। पार्टी के बाद वे रात में पटवारी की कार से घर के लिए निकले। भारी बारिश के चलते नदी उफान पर थी। करबला पुल डूबा हुआ था। सर्चिंग में लगी टीम का कहना है कि संभवत: तेज बहाव में उन्होंने कार ब्रिज पर से निकालने की कोशिश की और गाड़ी समेत दोनों बह गए। घरवाले अगले दिन यानी मंगलवार दोपहर तक उनके आने का इंतजार करते रहे।

रेस्क्यू टीम को पटवारी महेंद्र सिंह रजक का शव घटनास्थल से 12 किलोमीटर दूर नदी में मिला। महेंद्र के यहां छह महीने पहले ही बेटे का जन्म हुआ था
आधा दिन बीतने के बाद तहसीलदार का बेटा पुष्पेंद्र थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस-प्रशासन एक्टिव हुआ और नदी में सर्चिंग शुरू हुई। बुधवार सुबह करबला पुल के पास एक कार मिली। जांच में पता चला कि यह कार पटवारी महेंद्र रजक की है। इसी कार से दोनों पार्टी मनाने निकले थे। गोताखोरों ने नदी में सर्चिंग शुरू की। घटनास्थल से करीब 12 किमी दूर पटवारी का शव मिला। तहसीलदार को भी काफी तलाशा गया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बुधवार शाम को‎ एसडीईआरएफ की टीम ने भी कोशिश शुरू की
सीहोर से अवंतीपुरा के पास नदी और डैम के बीच रेस्क्यू टीम काे पटवारी महेंद्र सिंह रजक की कार फंसी मिली। रेस्क्यू टीम को पटवारी का शव भी मिला है।
दो मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
पटवारी रजक परिवार के साथ सीहोर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहते थे। उनकी पोस्टिंग नसरुल्लागंज में थी। पटवारी की 6 साल की बेटी और 6 महीने का बेटा है। पटवारी महेंद्र के पड़ोसी राजीव गुजराती ने बताया कि महेंद्र काफी होनहार और मिलनसार थे। उन्होंने बहुत संघर्ष किया। कुछ दिन पहले ही उनके जीवन में खुशी भरे पल आए थे। अब वे अपने दोनों बच्चों और परिवार को छोड़कर चले गए।
पटवारी रजक के दो बच्चे हैं, बेटी 6 साल की और बेटा 6 महीने की।
तहसीलदार का परिवार लौटने का कर रहा इंतजार
तहसीलदार नरेंद्र सिंह ठाकुर शुगर फैक्ट्री चौराहे के पास रहते हैं। वे शाजापुर के मोहन बड़ोदिया में पदस्थ हैं। 15 अगस्त की छुट्‌टी के कारण घर आए हुए थे। उनका पूरा परिवार सीहोर में रहता है। सर्चिंग के दौरान परिजन करबला पुल के पास ही थे। भगवान से वो सिर्फ यहीं प्रार्थना कर रहे थे कि वे सही सलामत घर लौट आएं। बता दें, सीहोर में 15 अगस्त को 148 MM मतलब लगभग 6 इंच बारिश हुई थी। इसके कारण नदी नाले में काफी तेज बहाव था। अगस्त महीने में 24 घंटे में हुई बारिशों में 15 अगस्त की बारिश सबसे ज्यादा है
तहसीलदार नरेंद्र सिंह ठाकुर के बेटे ने पिता की गुमशुदगी दर्ज करवाई, जिसके बाद नदी में सर्चिंग शुरू की गई। तीन दिन बाद भी तहसीलदार का पता नहीं चल सका
करबला पुल से एक‎ किमी दूर कार पानी में दिखाई दी
सोमवार रात 11.30 बजे मोहन‎ बड़ोदिया के तहसीलदार नरेंद्र‎ ठाकुर एक फार्म हाउस से पटवारी‎ महेंद्र रजक के साथ शुगर मिल‎ चौराहा स्थित अपने घर आ रहे थे।‎ इस बीच इंदौर नाका स्थित मंत्री‎ पेट्रोल पंप से उनकी कार करबला‎ रोड की तरफ जाती दिखाई दी थी।‎ नदी में उस समय तक काफी पानी‎ था। इसलिए प्रशासन का अमला‎ तहसीलदार और पटवारी की‎ तलाश में जुट गया था। पहले दिन‎ मंगलवार को शाम तक कुछ पता‎ नहीं चल सका। बुधवार सुबह‎ से जब फिर से सर्चिंग आपरेशन शुरू‎ किया तो करबला पुल से करीब एक‎ किमी दूर कार पानी में दिखाई दी। करीब 12 किमी दूर छापरी के‎ पास पटवारी मृत मिले
पटवारी रजक के दो बच्चे हैं, बेटी 6 साल की और बेटा 6 महीने की

ये सवाल अनसुलझे‎

  • तहसीलदार सीहोर के शुगर‎ फैक्ट्री चौराहा के रहने वाले हैं।‎ उस दिन तेज बारिश थी, इसलिए‎ उन्हें करबला पुल पर कितना‎ पानी होगा, इसका अंदाजा होगा।‎ फिर भी वह सीवन नदी चौराहा‎ से ना आते हुए करबला से गए।‎
  • जब तेज बारिश हो रही थी‎ और हाई अलर्ट था तो इस‎ खतरनाक पुल पर आवागमन‎ रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं‎ थी। यदि वहां पर व्यवस्था होती‎ तो इस तरह का हादसा नहीं‎ होता।‎

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