शिवपुरी गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले गणेश उत्सव पर्व को मनाने के लिए श्रद्धालुओं की धूम है। खास बात यह है कि शिवपुरी में दो परंपराएं हैं ।पहली परंपरा भगवान गणेश के विसर्जन डोल ग्यारस की है। जिसमें चतुर्थी से लेकर 11 तक भगवान की पूजा अर्चना विशेष रूप से की जाती है। और फिर डोल ग्यारस को भगवान का डोला विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।
जबकि दूसरी परंपरा में चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भगवान की पूजा अर्चना की जाती है और फिर अनंत चतुर्दशी की दोपहर से लेकर रात तक भगवान गणेश की विसर्जन यात्रा निकलती है।
इसी क्रम में मंगलवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर रखी गई गणेश मूर्तियों में से कुछ मूर्तियों के विसर्जन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, जिसमें दोपहर 12 बजे से लेकर देर शाम तक भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ के नारे लगाकर भगवान गणपति की विदाई श्रद्धा भाव के साथ की गई। इस अवसर पर नीलगर चौराहे सहित शहर के कई हिस्सों से भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए गणेश कुंड श्रद्धालुओं द्वारा भक्ति भाव के साथ ले जाया गया।
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