स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार की मंशा के तहत शुक्रवार को शिवपुरी जिले के सभी शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में “उमंग कार्यक्रम” का आयोजन हुआ। थीम रखी गई “उमंग है तो जीवन में रंग है”। कार्यक्रम से पहले सभी स्कूलों में उमंग किट वितरित की गई, लेकिन किट की सप्लाई में गड़बड़ी सामने आई है।
1869 रुपए की किट – असल में क्या दिया गया -
शिक्षकों के खातों से 1869 रुपए की राशि काटकर यह किट दी गई, जिसे बाद में आरटीजीएस से वापस करने की व्यवस्था है। गाइडलाइन के मुताबिक किट में यह सामान होना था:
1 प्लास्टिक शिकायत पेटी – 169 रुपए
4 एसीपी/एपीपी शीट (4x4 साइज) – 1400 रुपए
A3 साइज के 10 पोस्टर – 300 रुपए
यानी कुल लागत 1869 रुपए। लेकिन शिक्षकों और जानकारों का कहना है कि बाजार में यह पूरा सामान एक हजार रुपए से ज्यादा का नहीं आता।
कैसे हुई गड़बड़ी -
शिवपुरी में वितरित किटों में 4 शीट की जगह सिर्फ 2 शीट ही दी गईं। यानी प्रत्येक किट में करीब 700 रुपए की सीधी कटौती हुई। यही नहीं, पूरी किट की प्रिंटिंग और सप्लाई का काम शिवपुरी शहर के एकमात्र प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया था, जिसने शिक्षकों से राशि वसूल कर किटें उपलब्ध कराईं।
जिम्मेदारों का जवाब -
जब इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा -
“उमंग अभियान बच्चों की समस्याएं दूर करने और उन्हें डिप्रेशन से बचाने के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत हर स्कूल में उमंग कार्डिनेटर और उमंग कॉर्नर बनाया गया है। बच्चे चाहें तो अपनी समस्याएं लिखकर शिकायत पेटी में डाल सकते हैं।”
लेकिन जब किट में गड़बड़ी का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा
कि “आपके द्वारा यह जानकारी दी गई है। इसकी जांच कराई जाएगी, उसके बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा।”


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