मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 मई सोमवार को श्योपुर में कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े से दो मादा चीतों को सुबह कूनो नदी के समीप स्थित साइट से खुले जंगल में मुक्त करेंगे। साथ ही कूनो
नेशनल पार्क का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दो चीतों को खुले जंगल में छोड़े जाने का यह कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति प्रदान करेगा तथा भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा।
बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों ने अपनी क्वारंटीन अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है। इसके बाद उन्हें छोटे बाड़ों में रखा गया था, ताकि वे स्वयं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकें। अब इनमें से दो चीतों को पूर्णतः खुले जंगल में मुक्त किये जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य प्रदेश से लुप्त हुये चीतों की प्रजाति को पुनर्स्थापित करना, उनकी संख्या में वृद्धि करना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार और विचरण के लिए तैयार करना है।
फरवरी में बोत्सवाना से आये 9 चीते
फरवरी 2026 के अंत में बोत्सवाना से नौ नए चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनमें 6 मादा और 3 नर शामिल हैं। इन चीतों के आगमन के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या, देश में जन्मे शावकों सहित, बढ़कर 57 हो गई है। यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अंतर्गत तीसरा बड़ा अंतर्राष्ट्रीय चरण है। नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को 8 चीते भारत लाए गए थे, जबकि वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। बोत्सवाना से आए चीतों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से ग्वालियर लाया गया था। यहां से उन्हें हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीते अधिक जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे कूनो में चीतों की स्वस्थ और दीर्घकालिक आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह भी उम्मीद जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुल-मिल जाएंगे। इन चीतों को क्वारंटीन एवं अनुकूलन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद गांधी सागर एवं नौरादेही जैसे अन्य अभयारण्यों में भी बसाने की तैयारी की जा रही है। कूनो नेशनल पार्क देश में वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।
0 टिप्पणियाँ