- क्या पुलिस और आबकारी विभाग को गांवों में फैल रहा यह ज़हर दिखाई नहीं देता?
- क्या कार्यवाही सिर्फ कागज़ों पर होगी या इस बेलगाम ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर जेल भेजा जाएगा?
शिवपुरी | अखिलेश वर्मा
कानून की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसकी जीती-जाती मिसाल देखना हो तो पोहरी अनुविभाग के चर्च शराब ठेके पर चले आइए। आबकारी विभाग के दफ्तरों से चंद दूरी पर, नियमों को पैरों तले रौंदते हुए मासूम बच्चों के हाथों में शराब की बोतलें थमाई जा रही हैं। ऑन-कैमरा लाइव रिपोर्टिंग में नाबालिग को शराब बेचते रंगे हाथों पकड़ा गया है, लेकिन मजाल है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटी हो!
'अकेला मैं ही थोड़ी बेच रहा हूँ!' — ठेकेदार की गुंडागर्दी और बेतुका तर्क
जब इस काली कमाई के काले खेल पर शराब ठेकेदार से उसका पक्ष माँगा गया, तो जो जवाब मिला वह पूरे सिस्टम को मुँह चिढ़ाने वाला है। ठेकेदार ने बेखौफ होकर कैमरे पर कहा:
"मैं अकेला नहीं बेच रहा, पूरे जिले में इसी तरह बिक्री हो रही है, उसी हिसाब से मैं भी कर रहा हूँ।"
ठेकेदार का यह बयान साफ बयां करता है कि उसे न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का। सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग ने शराब माफिया को पूरे जिले में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने का 'मौन लाइसेंस' दे रखा है?
गांवों में बिछा दिया 'अवैध शराब' का जाल
चर्च क्षेत्र की मुख्य दुकानों (चर्च, बिलौआ और भेसरावन) तक ही यह गोरखधंधा सीमित नहीं है। ठेकेदार के करिंदों ने आसपास के दर्जनों गांवों को अवैध शराब की मंडी बना दिया है:
- हिनौतिया, बागलोंन, मोहरा, देहदे, डोभा
- गल्तूनी, खरवाया, मेहनोलनी, पारा और दोरानी
इन सभी गांवों में अवैध शराब की धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है, जिससे ग्रामीण अंचलों का माहौल पूरी तरह ज़हरीला हो चुका है।
एसपी का 'नशामुक्ति अभियान' बनाम आबकारी की 'मूक सहमति'
एक तरफ शिवपुरी एसपी जिले भर में ढोल-नगाड़ों के साथ 'नशामुक्ति अभियान' चला रहे हैं, लोगों को जागरूक करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, नाक के नीचे चर्च क्षेत्र में खुलेआम नाबालिगों से शराब बिकवाकर पूरे अभियान का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।


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