
शिवपुरी । शनिवार को शिवपुरी बस स्टैंड पर जो हुआ, उसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। नशे की तलब बुझाने के लिए 2 हजार रुपये की जेब काटने उतरे एक नशेड़ी युवक की भीड़ ने बीच सड़क जमकर 'कुटाई' कर दी। जान बचाकर भागा यह युवक तो बस एक बानगी है—असली सच यह है कि स्मैक के अंधे कुएं में उतर चुका शिवपुरी का युवा अब अपनी हर सांस के साथ जुर्म की दलदल में धंसता जा रहा है।
चाहे देहात हो या कोतवाली, शहर के तीनों थाना क्षेत्रों में 'सफेद पाउडर' की होम डिलीवरी बेधड़क जारी है।
लुधावली से फतेहपुर तक सिरिंज, नशा और खुला खेल!
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो खाकी के इकबाल को मुंह चिढ़ा रहे हैं:
- लुधावली का वायरल सच: एक मजदूर अपनी मेहनत के ₹1000 में से ₹500 सिर्फ इसलिए फूंक रहा है ताकि रगों में सिरिंज घोंप सके। उसका दावा है—लुधावली पानी की टंकी के पास स्मैक ऐसे मिलती है जैसे किराने की दुकान पर टॉफी!
- फतेहपुर का खुला बाजार: यहां तो बाकायदा सप्लायर युवाओं की कतार लगाकर खुलेआम मौत बांटते दिख रहे हैं।
- मेडिकल स्टोर्स पर मेहरबानी: नशा तो छोड़िए, इंजेक्शन और सिरिंज तक बिना किसी रोक-टोक और पर्चे के हाथों-हाथ बांटे जा रहे हैं।
सरगना मौज में, प्यादों पर '15 दिन वाली' खानापूर्ति?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई सिर्फ उन 'छोटे प्यादों' या नशेड़ियों तक सिमट कर रह जाती है, जो खुद अपनी लत पूरी करने के लिए पेडलर बन चुके हैं।
बड़ा सवाल: स्मैक की सप्लाई चेन की जड़ यानी "मुख्य सरगनाओं" पर शिकंजा कसने में पुलिस के हाथ क्यों कांपते हैं? आखिर क्यों सिर्फ 15 दिन के 'विशेष अभियानों' और जागरूकता के भाषणों से पल्ला झाड़ लिया जाता है?
जिम्मेदारों की रटी-रटाई सफाई
मामले पर एडिशनल एसपी आर.डी. प्रजापति का वही पुराना, घिसा-पिटा बयान सामने आया है— "पुलिस लगातार कार्रवाई कररही है। हाल ही में 15 दिन का विशेष अभियान चलाकर जागरूकता फैलाई गई है और यह आगे भी जारी रहेगा।"
कड़वा सच: अगर 15 दिन के 'सघन अभियान' के बाद भी पानी की टंकियों के पास सिरिंज से नशा लिया जा रहा है और बस स्टैंड पर जेबें कट रही हैं, तो समझ जाइए कि खाकी की 'जागरूकता' पर स्मैक माफिया का खौफ भारी पड़ चुका है!

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