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Shivpuri News : आधे घंटे की राहत के पीछे छिपा गहरा जल संकट: शिवपुरी में मानसून की बेरुखी और मड़ीखेड़ा की चिंता


शिवपुरी। बुधवार दोपहर हुई आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने भले ही शिवपुरी शहर को तरबतर कर दिया और लोगों को उमस भरी गर्मी से तात्कालिक राहत दिला दी, लेकिन यह बारिश जिले पर मंडरा रहे सूखे के बादलों को छांटने के लिए नाकाफी है। सड़कों पर बहता पानी और सुहावना हुआ मौसम एक सुखद भ्रम जरूर पैदा करता है, लेकिन भू-अभिलेख और सिंचाई विभाग के आंकड़े एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि अगस्त का पहला सप्ताह बीत जाने के बाद भी शिवपुरी में मानसून का ग्राफ सामान्य से काफी नीचे अटका हुआ है।

आंकड़ों की जुबानी: पिछले साल से बहुत पीछे शिवपुरी 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिले में अब तक महज 292.36 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 1040.48 मिमीबारिश की तुलना में तीन गुना से भी कम है। जिले की सामान्य औसत बारिश 816.3 मिमी है, और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस आंकड़े तक पहुंचना भी अब एक कठिन चुनौती नजर आ रहा है। तहसीलवार स्थिति और भी विकट है; खनियाधाना (203.50 मिमी) और बैराड़ (179 मिमी) जैसे इलाके सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

मड़ीखेड़ा बांध का घटता जलस्तर: भविष्य के संकट की आहट कम बारिश का सीधा और घातक असर जिले की जीवन रेखा माने जाने वाले अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध पर पड़ रहा है। वर्तमान में बांध अपनी कुल क्षमता (834.83 मिलियन घनमीटर) का मात्र 58.53 प्रतिशत (488.63 मिलियन घनमीटर) ही भर सका है। इसकी तुलना अगर बीते वर्ष से करें, तो 4 अगस्त 2025 तक बांध 74.59 प्रतिशत भर चुका था और गेट खोलने की नौबत आ गई थी। इस बार बांध का जलस्तर 339.70 मीटर पर ही ठिठका हुआ है, जो आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई के लिए बड़े संकट का संकेत दे रहा है।

अस्थायी राहत बनाम स्थायी समाधान बुधवार की बारिश से भले ही निचले इलाकों में जलभराव हुआ हो और लोग मौसम का आनंद ले रहे हों, लेकिन जल-प्रबंधन और कृषि के दृष्टिकोण से यह बारिश केवल 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हुई है। जब तक आने वाले दिनों में पूरे जिले में अनवरत और झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं होता, तब तक न तो भूजल स्तर में सुधार होगा और न ही जलाशयों की प्यास बुझेगी। शिवपुरी के लिए केवल क्षणिक रिमझिम नहीं, बल्कि एक व्यापक और मूसलाधार स्पेल की दरकार है, अन्यथा आने वाला साल जल संकट की एक नई त्रासदी लेकर आ सकता है।

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