शिवपुरी( मध्य प्रदेश,) मध्यप्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी है ' चुनाव के इस माहौल में जहां आचार संहिता की घोषणा कभी भी की जा सकती है पर चुनाव आयोग के नियम कायदे कानून और पेड न्यूज़ मामले से सोशल मीडिया को पूरी तरह दूर रखा गया है ऐसा जिला जनसंपर्क अधिकारी जिला शिवपुरी का कहना है कि अभी हाल ही में हुई बैठक में उन्हें निर्देश दिए गए हैं की .....
. मध्यप्रदेश में सोशल मीडिया और मासिक .साप्ताहिक. और पाक्षिक अखबार .को निर्वाचन आयोग की कार्रवाई से दूर रखा गया है .इन अखबारों के पत्रकारों को और सोशल मीडिया पर न्यूज़ पोर्टल चलाने वाले पत्रकारों को चुनाव की प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा ऐसे निर्देश जिला जनसंपर्क अधिकारी को भोपाल जनसंपर्क संचनालय से मौखिक का आदेश मिले हैं. जब पेड न्यूज के दायरे में सोशल मीडिया आएगी नहीं तो वे स्वतंत्र हैं समाचार व प्रत्याशी के समर्थन में खबर बनाकर एक अलग माहौल पैदा करने के लिए स्वतंत्र हैं जब इस कार्रवाई से सोशल मीडिया को पूरी तरह अछूत माना गया है तो ? भोपाल से लेकर दिल्ली से चलने वाली न्यूज़ पोर्टल अपना इस्तेमाल अलग तरीके से करेंगे. ? क्योंकि हर बड़े अखबार का एक पोर्टल भी सोशल मीडिया में हमेशा चलता है. और कई नामचीन पत्रकार अपना सोशल मीडिया में पोर्टल चलाते हैं और जनता में अपना प्रभाव रखते हैं . और प्रशासन को इनके लेख और समाचार प्रभावित करते हैं . सोशल मीडिया से डरी सरकार मध्य प्रदेश सरकार पूरी तरह हताश और निराश हो चुकी है क्योंकि उन्हें डर है कि यह चुनाव सोशल मीडिया उसे हरवा देगी . सरकार की ओर से चुनाव आयोग को सिफारिश की गई है कि सोशल मीडिया को इस चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए? जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश के जिलों में कुछ सोशल मीडिया कर्मी पर कुछ ज्यादा ही मेहरबानी और शासन का पैसा लुटाने पर उतारू क्यों है सोशल मीडिया में कई न्यूज़ पोर्टल तो ऐसे हैं जिनमें कुछ न्यूज़ पोर्टल शिवपुरी और भोपाल ग्वालियर से ऑपरेट होते हैं जन जनसंपर्क मंत्री ने खुला संरक्षण दे?? रखा है और बगैर कोई विज्ञापन नीति के इन पोर्टल ओं को भारी विज्ञापन दिए जा रहे हैं . जनसंपर्क मंत्री अपने चहेतों पर इतने मेहरबान रहते हैं की मध्य प्रदेश संचनालय जोकि सरकार के नियम के दायरे में आता है वह दायरे जनसंपर्क मंत्री ने खुद खत्म किए और अपने रिश्तेदारों को न्यूज़ पोर्टल खुद बनवाए??? क्या पत्रकारों की कमी है मध्य प्रदेश में और 15 और 20 लाख के विज्ञापन जारी किए जबकि इन पोर्टल ओं को उनके पड़ोसी नहीं देखते और ना पढ़ते है मध्य प्रदेश सरकार का पैसा उनके रिश्तेदारों को जनसंपर्क मंत्री ने पानी की तरह बहाया ?इसकी जांच होनी चाहिए निर्वाचन आयोग मध्य प्रदेश जनसंपर्क संचनालय भोपाल मैं जारी किए गए इन के आदेशों की जांच करें . और उसके बाद हम पर नियम का डंडा चलाएं. .....,.. जनसंपर्क मंत्री की गतिविधियों से शिवराज सिंह परेशान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपने ही मंत्री की मनमानी ओं से परेशान है और इस बार लगता है कि वो सत्ता से हाथ धो लेंगे................... जनसंपर्क मंत्री पर किसी की लगाम नहीं है इन के आदेश ऐसे माने जाते हैं कि मानो मुख्यमंत्री खुद आदेश दे रहे हो? सरकार क्यों दे रही है बढ़ावा? मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी को मध्य प्रदेश से बाहर करवाने में जनसंपर्क मंत्री का बहुत बड़ा हाथ इस चुनाव के बाद माना जाएगा?
दिल्ली की अदालत में इनके खिलाफ एक पेड न्यूज का मामला और विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए यह पूरी तरह है अयोग्य है? सदन में कांग्रेस के कई बार विरोध करने के बाद भी इन का इस्तीफा ना लिया जाना मंत्रिमंडल में बने रहना और दतिया जिले को नगर निगम की घोषणा करवाना बड़ा ही संदेहास्पद लगता है. बालकृष्ण शर्मा. चक्र वीर न्यूज़

0 टिप्पणियाँ