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विवेक व्यास कोलारस शिवपुरी जिले के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले


*अनियंत्रित प्रशासनिक तंत्र के साथ जबाबदेही नेतृत्व की कमी से जनता नाखुश।
*दिन रात सोसल मीडिया पर सड़कों और सीवर प्रोजेक्ट को लेकर मध्यप्रदेश में हुआ कुख्यात ।
*sc st के चलते महल को काले झंडे दिखना नई सोच का आगाज।
*मोरेना,दतिया का विकास देख जनता का शिवपुरी के नेताओं से उठा विस्वास।
##विवेक व्यास/// दिशा वदले तो दशा बदले।।
@मध्यप्रदेश में राजा महाराजाओं की ग्रीष्मकालीन राजधानी कही जाने वाली शिव की नगरी शिवपुरी पर विगत 10 साल से राहु केतु की ग्रह दशा इस तरह प्रभाबी है कि यहां के सभी नेताओं की राजनैतिक जीवन का पतन हो गया।
एक समय महल के  समकक्ष रसूक रखने वाले आधा दर्जन नेता शिवपुरी की राजनीति को राजधानी में भी दम से चमका कर रखते थे इसी कारन विधान सभा मे और मंत्रालय में भी इनकी तूती बोलती थी।
उच्चस्तरीय राजनीतिक सडयंत्र का शिकार होकर कुछ तो समय के साथ शून्य हो गए कुछ बनिया की भूमिका में आ गए और कुछ महल की शरण मे पहुच गए।
बस यही से शिवपुरी नगरी की दुर्दशा की इबारत शुरू हो गई।
न तो आज शिवपुरी में शक्तिशाली पक्ष है और न ही विपक्ष।
पूरा कारोबार प्रश्सिनिक तंत्र के अधीन है।यहां आने के बाद फायर ब्रांड कलेक्टर की कलेक्टरी को भी जंग लग जाती है।
राजनैतिक रूप से अनाथ शिवपुरी को प्रश्सिनिक अमला केवल एक नेता की शरण पाकर आसानी से लूट कर चलता बनता है।ऐसा कई वर्षों से देखने को मिल रहा है।
पत्रकार जगत की आवाज़ भी अब टूटी फूटी सड़कों में दबने लगी है जो प्रजातंत्र के लिए घातक है।
10 साल तक शिवपुरी की दुर्दशा की आवाज़ उठाकर पूरी जनता हार चुकी है सत्याग्रह, हड़ताल,ज्ञपण, आंदोलन सहित प्रजातंत्र में अपनी आवाज़ सत्ता के कानों में पहुंचाने के सभी तरीके जम्बूरीयत ने अपना लिए किन्तु सभी निरर्थक।
कुछ समय से अब शिवपुरी की जनता का रूख बदला नजर आ रहा है।परंपरागत राजनैतिक सोच को तिलांजलि देकर नई पीढ़ी ने महल के दोनों ध्रुबों को काले झंडे बताकर यर सिद्ध कर दिया कि अब जनता फर्जी और चिलमी बादो से ऊब गई है। मध्यप्रदेश में शिवपुरी की दुर्दशा ग्रामीण अंचल से भी बुरी हो गई है।एक समय मोरेना और दतिया हिंसा और गैंगवार को लेकर कुख्यात थे एयर विकास में शिवपुरी के आगे शुन्य थे किंतु उन्नत और जबाबदेही सोच रखने वाले नेता नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा ने इन शहरों को आज नगर निगम का दर्जा दिलाकर राजनीतिक माटी के प्रति अपनी सकारात्मक सोच
का परिचय दिया है।
यही कारण है ये साधरण नेता से जननायक बन गए।
इनकी तुलना में शिवपुरी विधानसभा में कोई ऐसा नेता नजर नही आ रहा है जो जनता को विस्वास में ले सके । अब तो जो राहु केतु की छाया से दूर थे उन पर भी संकट के बादल छाते दिख रहे है।
आखिर 10 साल से शिवपुरी का विकास कदम दर कदम पीछे होता जा रहा है और अंध भक्त यहां रामराज्य की डींगे हांकते नही लजाते ।
क्या कहा जाये घोर कलयुग की निशानी शिवपुरी में देखने को मिल रही है।इन सब संकेतों से अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में परंपरागत नेताओं का पलायन करना ही ठीक है एक बार शिवपुरी को फिर उनके हाथों में सौपना ठीक है जो पुराने गैम्बलर रहे है और जो राहू केतु की दशा से अचेत पड़े है।

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