तम्बाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध कार्यशाला सम्पन्न
शिवपुरी, 07 फरवरी 2019/ तम्बाकू के सेवन से शरीर के हर अंग को कैंसर का खतरा हो सकता है। तम्बाकू के सेवन से प्रतिवर्ष विश्व में करीब 50 लाख और भारत में 8 लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण होती है। उक्त आशय की जानकारी जिले में तम्बाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में आज जिला चिकित्सालय के एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में अनुविभागीय दण्डाधिकारी शिवपुरी श्री अतेन्द्र सिंह गुर्जर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित विकासखण्ड स्तरीय कार्यशाला के दौरान दी गई।
कार्यशाला की अध्यक्षता तम्बाकू नियत्रंण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ.आशीष व्यास ने की। कार्यशाला में उपसंचालक जनसंपर्क श्री अनूप सिंह भारतीय, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री अजमेर सिंह यादव, पत्रकार श्री संजीव बांझल, नेहरू युवा केन्द्र से श्री योगेश शाक्य, मैनर्स संस्था से फिरदोस खान, प्रीति सारस्वत, दिलीप रजक मदद महिला मण्डल से बीना चतुर्वेदी ने उपस्थित होकर सुझाव प्रस्तुत किए।
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं मध्यप्रदेश वॉलेटरी हैल्थ एशोसियेशन के सहयोग से स्थानीय संस्था मैनर्स सपोर्ट इन डब्लपमेंट द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यशाला में केन्द्र सरकार द्वारा तम्बाकू आपदा से लोगों को बचाने हेतु तम्बाकू नियंत्रण कानून (कोटपा 2003) के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री अतेन्द्र सिंह गुर्जर ने कार्यशाला में धूम्रपान के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि शासकीय कार्यालय परिसरों में धूम्रपान न हो, इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जाए। कोटपा कानून के तहत धूम्रपान करते पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी पर 200 रूपए और कार्यालय प्रमुख पर भी 600 रूपए की अर्थदण्ड की कार्यवाही की जाए। उन्होंने इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित की गई खण्डस्तरीय समिति के सदस्यों के अनुपस्थित होने पर नाराजगी भी व्यक्त की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला नोडल अधिकारी डॉ.आशीष व्यास ने बताया कि तम्बाकू नियंत्रण कानून की धारा 4 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित है। अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता पाया जाता है, तो उस पर 200 रूपए के अर्थदण्ड की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थलों के रूप में शासकीय कार्यालय, मनोरंजन केन्द्र, पुस्तकालय, अस्पताल, स्टेडियम, होटल, शोपिंग मॉल, कॉफी हाउस, निजी कार्यालय न्यायालय परिसर, रेल्वे स्टेशन, सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, सभागृह, एयरपोर्ट, प्रतिक्षालय, बस स्टॉप, लोक परिवहन शिक्षण संस्थान, टी स्टॉल, मिष्ठान भण्डार, ढावा एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है।
मध्यप्रदेश वॉलेटरी हैल्थ एशोसियेशन के श्री संजीव शर्मा ने तम्बाकू नियंत्रण कानून के समस्त धाराओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज के दायरें में तम्बाकू उत्पाद की विक्री करना कानूनन अपराध है और कानून का उल्लंघन करने वाले पर 200 रूपए का जुर्माना किया जा सकता है। साथ ही 18 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति को तम्बाकू उत्पादों की विक्री करना भी दण्डनीय अपराधि है। इसके अलावा बिना चित्रात्मक चेतावनी के तम्बाकू के उत्पादों की विक्री भी नहीं की जा सकती।
मैनर्स सपोर्ट इन डब्लपमेंट संस्था के श्री फिरदोस खान ने कहा कि इस संस्था द्वारा जिले में कानून के क्रियानवयन हेतु 6 विकासखण्डों में कार्यशालाओं का आयोजन आगामी समय में किया जाएगा। जिससे लोगों को जागरूक किय जा सके। कार्यशाला में बताया गया कि सार्वजनिक स्थलों पर साइनेज बोर्ड के माध्यम से लोगों को तम्बाकू के सेवन के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाए। उल्लेखनीय है कि तम्बाकू के धूंए में 400 किस्म के रसायन होते है। जिसमें से 60 तत्व कैंसर जैसे रोगों को उत्पन्न कर सकते है। तम्बाकू में मौजूद निकोटिन व्यक्ति को नशे का आदि बना देता है। यह धूम्रपान के 60 सेकेण्ड के अंदर मस्तिष्क में पहुंचकर फैफड़ो एवं धमनियों में घूल जाता है। दिलीप रजक द्वारा कार्यक्रम में अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
तम्बाकू के सेवन से होती है ये बीमारियां
तम्बाकू के सेवन से गले, मुंह, फेफड़े, आहार नली, गुर्दा, रक्त, पेट, मूत्राशय, स्तन, लीवर और गर्भाशय का कैंसर होता है। फेफड़ों संबंधी बीमारियों में फेफड़ों का सिकुड़ना तथा कोशिकाओं में गांठ बनना, अस्थमा, ब्रोकाइटिस, हृदय तथा रक्त संबंधी बीमारियों में अंग का गल जाना, अपंगता आना हृदयाघात, हृदयशूल(दर्द), रक्तवाहिका में रक्त प्रवाह की रूकावट, मस्तिष्क संबंध रोग में नशावृत्ति, लकवा, मस्तिष्क की रक्त वाहिनियों में रूकावट, स्त्रियों में बाँझपन, गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, कम वजन के बच्चे का जन्म, मरे हुए शिशु का जन्म, शिशुओं में जन्मजात विकृति, पुरूषो में नपुंसकता, शुक्राणुओं की कमी होना जैसी बीमारियां होती है।
शिवपुरी, 07 फरवरी 2019/ तम्बाकू के सेवन से शरीर के हर अंग को कैंसर का खतरा हो सकता है। तम्बाकू के सेवन से प्रतिवर्ष विश्व में करीब 50 लाख और भारत में 8 लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण होती है। उक्त आशय की जानकारी जिले में तम्बाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में आज जिला चिकित्सालय के एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में अनुविभागीय दण्डाधिकारी शिवपुरी श्री अतेन्द्र सिंह गुर्जर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित विकासखण्ड स्तरीय कार्यशाला के दौरान दी गई।
कार्यशाला की अध्यक्षता तम्बाकू नियत्रंण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ.आशीष व्यास ने की। कार्यशाला में उपसंचालक जनसंपर्क श्री अनूप सिंह भारतीय, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री अजमेर सिंह यादव, पत्रकार श्री संजीव बांझल, नेहरू युवा केन्द्र से श्री योगेश शाक्य, मैनर्स संस्था से फिरदोस खान, प्रीति सारस्वत, दिलीप रजक मदद महिला मण्डल से बीना चतुर्वेदी ने उपस्थित होकर सुझाव प्रस्तुत किए।
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं मध्यप्रदेश वॉलेटरी हैल्थ एशोसियेशन के सहयोग से स्थानीय संस्था मैनर्स सपोर्ट इन डब्लपमेंट द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यशाला में केन्द्र सरकार द्वारा तम्बाकू आपदा से लोगों को बचाने हेतु तम्बाकू नियंत्रण कानून (कोटपा 2003) के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री अतेन्द्र सिंह गुर्जर ने कार्यशाला में धूम्रपान के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि शासकीय कार्यालय परिसरों में धूम्रपान न हो, इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जाए। कोटपा कानून के तहत धूम्रपान करते पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी पर 200 रूपए और कार्यालय प्रमुख पर भी 600 रूपए की अर्थदण्ड की कार्यवाही की जाए। उन्होंने इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित की गई खण्डस्तरीय समिति के सदस्यों के अनुपस्थित होने पर नाराजगी भी व्यक्त की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला नोडल अधिकारी डॉ.आशीष व्यास ने बताया कि तम्बाकू नियंत्रण कानून की धारा 4 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित है। अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता पाया जाता है, तो उस पर 200 रूपए के अर्थदण्ड की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थलों के रूप में शासकीय कार्यालय, मनोरंजन केन्द्र, पुस्तकालय, अस्पताल, स्टेडियम, होटल, शोपिंग मॉल, कॉफी हाउस, निजी कार्यालय न्यायालय परिसर, रेल्वे स्टेशन, सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, सभागृह, एयरपोर्ट, प्रतिक्षालय, बस स्टॉप, लोक परिवहन शिक्षण संस्थान, टी स्टॉल, मिष्ठान भण्डार, ढावा एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है।
मध्यप्रदेश वॉलेटरी हैल्थ एशोसियेशन के श्री संजीव शर्मा ने तम्बाकू नियंत्रण कानून के समस्त धाराओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज के दायरें में तम्बाकू उत्पाद की विक्री करना कानूनन अपराध है और कानून का उल्लंघन करने वाले पर 200 रूपए का जुर्माना किया जा सकता है। साथ ही 18 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति को तम्बाकू उत्पादों की विक्री करना भी दण्डनीय अपराधि है। इसके अलावा बिना चित्रात्मक चेतावनी के तम्बाकू के उत्पादों की विक्री भी नहीं की जा सकती।
मैनर्स सपोर्ट इन डब्लपमेंट संस्था के श्री फिरदोस खान ने कहा कि इस संस्था द्वारा जिले में कानून के क्रियानवयन हेतु 6 विकासखण्डों में कार्यशालाओं का आयोजन आगामी समय में किया जाएगा। जिससे लोगों को जागरूक किय जा सके। कार्यशाला में बताया गया कि सार्वजनिक स्थलों पर साइनेज बोर्ड के माध्यम से लोगों को तम्बाकू के सेवन के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाए। उल्लेखनीय है कि तम्बाकू के धूंए में 400 किस्म के रसायन होते है। जिसमें से 60 तत्व कैंसर जैसे रोगों को उत्पन्न कर सकते है। तम्बाकू में मौजूद निकोटिन व्यक्ति को नशे का आदि बना देता है। यह धूम्रपान के 60 सेकेण्ड के अंदर मस्तिष्क में पहुंचकर फैफड़ो एवं धमनियों में घूल जाता है। दिलीप रजक द्वारा कार्यक्रम में अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
तम्बाकू के सेवन से होती है ये बीमारियां
तम्बाकू के सेवन से गले, मुंह, फेफड़े, आहार नली, गुर्दा, रक्त, पेट, मूत्राशय, स्तन, लीवर और गर्भाशय का कैंसर होता है। फेफड़ों संबंधी बीमारियों में फेफड़ों का सिकुड़ना तथा कोशिकाओं में गांठ बनना, अस्थमा, ब्रोकाइटिस, हृदय तथा रक्त संबंधी बीमारियों में अंग का गल जाना, अपंगता आना हृदयाघात, हृदयशूल(दर्द), रक्तवाहिका में रक्त प्रवाह की रूकावट, मस्तिष्क संबंध रोग में नशावृत्ति, लकवा, मस्तिष्क की रक्त वाहिनियों में रूकावट, स्त्रियों में बाँझपन, गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, कम वजन के बच्चे का जन्म, मरे हुए शिशु का जन्म, शिशुओं में जन्मजात विकृति, पुरूषो में नपुंसकता, शुक्राणुओं की कमी होना जैसी बीमारियां होती है।

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