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क्या कांग्रेस नागरिक संशोधन बिल का विरोध कर के सही कर रही है? / आपने विचार रखने का सबको अधिकार/ एंटी करप्शन न्यूज़

आपने विचार रखने का सबको अधिकार



मैं यहाँ सिर्फ यह बात ही रखूँगा की यह बिल असंवैधानिक क्यों है। यह इसलिए असंवैधानिक है क्योंकि इसमें आर्टिकल 14 के अनुसार जो सभी व्यक्तियों (नागरिकों और गैर-नागरिकों) से समान व्यवहार की बात है जिसमें धर्म-पंथ-नस्ल-नागरिकता-विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता उसका उल्लंघन इसलिए है कि यह 'केवल धर्म के आधार पर' शर्णार्थियों को नागरिकता देने या ना देने का आधार बनाता है और इस तरह भारत को कुछ विशेष धर्मों के व्यक्तियों के लिए उचित एवं अन्य के लिए अनुचित स्थान बनाता है।
आर्टिकल 14 में एक हिस्सा है 'रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन' का, जो उन स्थितियों में लागू होता जब कोई विशेष वर्ग उस वर्ग से होने की वजह से कोई भेदभाव या प्रताड़ना झेल रहा हो तब उसे समानता पर लाने हेतु विशेष प्रावधान संभव है।
मुस्लिमों को धर्म के आधार पर नागरिकता से वंचित करना इस 'रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन' के अंतर्गत नहीं आ सकता — क्योंकि अन्य देशों के मुस्लिमों के विभिन्न वर्ग जैसे शिया, बलोच, बोहरा, सूफ़ी भी विभिन्न अन्य बहुसंख्यक वर्गों से प्रताड़ना झेलने पर शरणार्थी बनने को मजबूर हो सकते हैं — और केवल धर्म के आधार पर (अर्थात उनकी परिस्थिति के अन्य मापदंडों को नजरअंदाज करते हुए ) उन्हें नागरिकता से नकारना किसी 'रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन' में नहीं आता।
इसलिए यह बिल असंवैधानिक है।
कांग्रेस कह रही है सरकार पाकिस्तान के पीड़ितों को नागरिकता दे रही है लेकिन जो पीड़ित कर रहे हैं उन्हें नागरिकता नहीं दे रही, इसलिए ये सेक्युलरिज़्म के खिलाफ है।
कांग्रेस जानती है ऐसा नहीं किया जा सकता, बस यही बहाना बना कर वो इसका विरोध कर रही है।
अब कल का ही ये मामला देखिये, पाकिस्तान में एक 14 साल की ईसाई धर्म की बच्ची को अगवा कर लिया गया और ये पाकिस्तान में रोज़ का है। न वहां कोई मानव अधिकार वाले हैं, न कोई सिविल सोसाइटी जो इनके लिए आवाज़ भी उठाए।
बाकी इसे लाने का उद्देश्य क्या है वो समझने वाले खूब समझते हैं - समर्थक भी और विरोधी भी।
ऐसे पाकिस्तान से आये पीड़ित भारत में होंगे, उन लोगों की नागरिकता में अड़चन डालन कैसे सही हो सकता है?
अभी सुप्रीम कोर्ट में भी इसे रोकने के लिए कांग्रेस पूरा ज़ोर लगाएगी।
संवैधानिक पेचीदगियां बता कर, सेक्युलरिज़्म की दुहाई देकर, इस देश में खुलेआम पाकिस्तान के हिन्दू-सिख-ईसाई,बौद्धों पीड़ितों को न्याय देने का विरोध हो रहा है।
मतलब क्या है इसका? क्या चाहते हैं ये? पाकिस्तान में हिन्दू मारे जाते हैं तो जाएँ, मगर वो भारत की तरफ आस न लगाएं?
या जो हिन्दू-सिख अपनी जान बचा कर भारत पहुँच गए हैं उन्हें दुबारा पाकिस्तान भेज दें? या उन्हें ऐसे ही शरणार्थी बना के रखा जाए?
कांग्रेस को 370 के हटने से समस्या है, तीन तलाक से समस्या है, सुप्रीम कोर्ट के एक स्पेसिफिक फैसले से भी समस्या है।
अगर कांग्रेस सही कर रही है तो एक काम करे।
अपने मेनिफेस्टो में डाल दे और खुल कर कहे कि वापिस आएंगे तो 370 को फिर से कश्मीर में लगाएंगे, तीन तलाक फिर से लाएंगे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटेंगे, क्यों नहीं कहते?
कांग्रेस को सोचना चाहिए, राजनितिक रोटियां सेकने के लिए देश में मुद्दों कि कमी नहीं है, लेकिन ऐसे ही कांग्रेस काम करती रही तो रही सही जनता जो उसपे भरोसा करती है उस से भी अपना विश्वास खो देगी।

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