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संपूर्ण जगत की रक्षा करने का सामर्थ्य राम नाम में है- राजेश्री महन्त*


*इससे अच्छा समय आपके जीवन में कभी भी नहीं आएगा*

*रामनवमी पर उसका ध्यान करें जिसके नाम का सुमिरन संसार के सभी देवी देवता किया करते हैं*

*मंगल भवन अमंगल हारी उमा सहित जेहि जपत पुरारी*

नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और पूरा विश्व महामारी के चपेट में है भारतवर्ष भी इससे अछूता नहीं है सभी काम धंधे बंद पड़े हैं आप सब अपने-अपने घरों में निवासरत हैं ऐसे समय में रामनवमी का महापर्व हम सबके सामने है क्यों न हम इस अवसर का सदुपयोग इस तरह से करें कि हमारा लोक और परलोक दोनों संवर जाए यह बातें प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने कही, उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के इतिहास में शायद यह प्रथम नवरात्रि का पर्व होगा जिसमे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर तथा सभी शासकीय, अशासकीय कार्यालय सब बंद पड़े हुए हैं नवरात्रि की चहल-पहल हम सब से कोषों दूर है और चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। हम सब एक महान अंतर्राष्ट्रीय आपदा से ग्रसित हैं ऐसे समय में हम सबको धीरज एवं साहस के साथ आगे बढ़ना है, इस बात का ध्यान रखें संपूर्ण जगत में राम नाम से बढ़कर महा औषधि कोई है ही नहीं इसका पान करके भगवान शंकर जी ने समुद्र से निकले हुए विष को भी अपने गले में धारण कर इस जगत की रक्षा की संपूर्ण विश्व आज वायरस (विषाणु) से त्रषित है हम सब को भी इससे बचने के लिए राम नाम का जप करना चाहिए इसके लिए रामनवमी से बढ़कर कोई भी पर्व नहीं है, इस दिन संपूर्ण ब्रह्मांड के नायक भगवान श्री रामचंद्र जी ने जगत के कल्याण के लिए मनुष्य का शरीर धारण कर जन्म लिया, आप सभी के जीवन में यह पहला नवरात्रि का पर्व होगा जिसमें आप मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे आदि से दूर होंगे, लेकिन कोई बात नहीं जहां पर हैं जैसे भी हैं परमात्मा का ध्यान वहीं पर रहते हुए करें, रामनवमी तो आपके जीवन में अनेकों बार आए हैं और आएंगे लेकिन इस तरह फुर्सत का क्षण मिल पाएगा या नहीं कहा नहीं जा सकता इसलिए समय का पूरा सदुपयोग करें। भगवान के नाम के महामंत्र का जाप "श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम" स्वयं करें एवं परिवार के सभी सदस्यों को भी कराएं ध्यान रहे भगवान शंकर भी अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ भगवान के नाम का जप निरंतर किया करते हैं रामचरितमानस में लिखा है "मंगल भवन अमंगल हारी उमा सहित जेहि जपत पुरारी" केवल भगवान भोलेनाथ ही नहीं संसार के सभी देवी देवता प्रभु श्री रामचंद्र जी के नाम का ही स्मरण करते हैं 'जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन' उनके नाम के सुमिरन मात्र से भगवान गणेश जी गणनायक बन गए आप सब यदि चाहें तो सुबह 8:00 बजे स्नान ध्यान से निवृत्त होकर भगवान रघुनाथ जी के तैल चित्र या उनकी मूर्ति राम दरबार आपके पास हो तो उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित कर पुष्पमाला, फूल, तुलसी, चंदन, अगरबत्ती जो कुछ भी पूजन सामग्री आपके पास हैं प्रभु को समर्पित करके मध्यकाल अर्थात दिन के 12:00 बजे तक भगवान के जन्मोत्सव के रूप में महामंत्र का जाप करें और फिर आरती स्तुति के पश्चात भगवान को घर में जो कुछ भी पकवान बना हो उसे तुलसी पत्ती से भोग लगाकर पूरा परिवार प्राप्त करें, रात्रि में यदि हो सके तो भगवान के नाम के महामंत्र का अखंड जाप पूरे परिवार सहित करते हुए रात्रि जागरण करें याद रखें आपने अपने जीवन के सैकड़ों रात सो करके बिता दिया एक रात्रि अपने स्वयं के कल्याण के लिए एवं जगत के कल्याण के लिए ईश्वर के चरणों में समर्पित करें इससे संपूर्ण विश्व का कल्याण होगा, हमें यह याद रखना है कि संपूर्ण जगत की रक्षा करने का सामर्थ्य राम नाम में व्याप्त है धर्म शास्त्रों में लिखा है "जगत्जैत्रकमंत्रेण रामनामना भिरक्षितम्" आप सभी अपना लोक और परलोक संवारें रामनवमी के महापर्व की आप सबको शुभकामनाएं महामारी की विपदा से डरे नहीं छत्तीसगढ़ी में भी कहावत है "राखही राम त लेगहि कोन लेगही राम राखहि कोन"

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