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शासकीय शिक्षक ने सुसाइड नोट में लिखा, किसी को अनुकंपा नियुक्ति मत देना, पीएफ के पैसे विभाग को दान


उज्जैन। बिरलाग्राम विनाेबा भावे पथ निवासी शासकीय शिक्षक कन्हैयालाल पिता पांचूलाल बैरवा (45) और बेटे आयुष (14) के गुरुवार काे फंदे पर झूलते शव मिले हैं। सबके साथ एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें लिखा है कि मेरे स्थान पर किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति न दी जाए। मेरी संपत्ति के उत्तराधिकारी मेरी पत्नी, बेटी एवं अन्य रिश्तेदार नहीं होंगे। इतना ही नहीं उन्होंने शिक्षा विभाग में जमा प्रोविडेंट फंड एवं ग्रेच्युटी आदि शिक्षा विभाग को दान कर दी।
बेटे आयुष के साथ फंदे पर झूले पिता कन्हैयालाल ने लिखा कि मेरी माैत के बाद पत्नी सुगना, बेटी आरती और रिश्तेदाराें काे चल-अचल संपत्ति में से काेई भी हिस्सा न दिया जाए। सुसाइड नाेट के पास ही वसीयत रखी है, जिसमें मैंने अपनी चल-अचल संपत्ति का वारिस बनाया है, उसके आधार पर ही मेरी चल-अचल संपत्ति दी जाए। बैंक ऑफ इंडिया के मेरे खाते में जाे पैसे है, वह भी मेरी वसीयत के आधार पर ही दिए जाए। मेरी माैत के बाद सुसाइड नाेट के पास रखे रुपयाें से मेरा दाह संस्कार कर दें। उसके बाद जाे पैसे बच जाए, उसे सरकारी अस्पताल में समाजसेवा कर रही जीवदया मानव सेवा समिति काे दान कर दिया जाए। मेरी माैत के बाद शिक्षा विभाग की नाैकरी किसी रिश्तेदार काे नहीं दी जाए, जाे पैसा शिक्षा विभाग से मिलना है, वह मैं शिक्षा विभाग काे ही देता हूं। मृत्यु के पूर्व यह बयान मृतक कन्हैयालाल के सुसाइड नाेट में सामने आया है।

2 दिन से दूध नहीं लिया था, दुर्गंध आने पर पता चला


सीएसपी मनाेज रत्नाकर और एफएसएल के डाॅ. अरविंद नायक ने माैके पर पहुंचकर घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। इसके बाद शव काे पीएम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया। पुलिस काे सुसाइड नाेट भी मिला। इसके मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला पारिवारिक विवाद की वजह से आत्महत्या का है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। 

3 साल से पत्नी दो संतानों को लेकर मायके में रह रही थी

पुलिस के मुताबिक कन्हैयालाल के दाे बेटे और एक बेटी है। पत्नी सुगनाबाई से किसी बात काे लेकर विवाद चल रहा था। इस वजह से सुगनाबाई बीते 3 सालाें से बेटे आकाश व बेटी आरती के साथ अपने मायके रामगंज मंडी के पास सातलखेड़ी गांव में रह रही हैं। कन्हैयालाल अपने एक बेटे आयुष के साथ ही विनाेबा भावे पथ पर रहा था। उसे शराब पीने की लत भी थी। कन्हैयालाल महिदपुर तहसील के गांव अरनिया में सरकारी शिक्षक के पद पर पदस्थ थे। 

वसीयत में उत्तराधिकारी बेटा बनाया था लेकिन वह तो फांसी पर झूलता मिला


सवा साल से स्कूल नहीं गए थे कन्हैया लाल



24 से 48 घंटे पहले हुई दोनों की मौत एक साथ


प्रथम दृष्टया पारिवारिक विवाद आ रहा सामने

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