भोपाल की करोंद अनाज मंडी में सोयाबीन की आवक 300 क्विंटल पर सिमट गई है, जबकि गेहूं की आवक एक हजार क्विंटल के पार बनी हुई है। शुक्रवार को भी इतनी ही आवक रही। अबकी बार सीजन की शुरुआत से ही सोयाबीन की आवक कमजोर है। एक दिन में अधिकतम तीन हजार क्विंटल सोयाबीन की ही बिकने आ सका। वर्तमान में आवक काफी कम हो गई है। इसके पीछे व्यापारी अतिवृष्टि एवं अफलन को बड़ी वजह बता रहे हैं। व्यापारी संजीवकुमार जैन ने बताया कि इस साल भोपाल समेत पूरे प्रदेश में सोयाबीन की पैदावार खासी प्रभावित हुई है। अतिवृष्टि एवं अफलन के कारण दाना न सिर्फ सिकुड़ गया बल्कि दागी भी रहा। इस कारण कई जगह तो एक हेक्टेयर में एक क्विंटल सोयाबीन की पैदावार भी नहीं हो पाई। इसका असर मंडियों में आवक पर पड़ा। शुक्रवार को कुल 282 क्विंटल सोयाबीन की आवक रही। किसानों को 3225 से 4300 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिले।
गेहूं की आवक बरकरार
इस साल प्रदेश में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। यही कारण है कि समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीदारी की गई। प्रदेश के साथ भोपाल में भी रिकॉर्ड खरीदी हुई थी। कई किसानों ने अपने घरों में गेहूं भरकर रखा था, जो अब वे मंडियों में ला रहे हैं क्योंकि आगामी मार्च-अप्रैल माह में नया गेहूं आ जाएगा। इस कारण मंडियों में गेहूं की आवक बनी हुई है। शुक्रवार को करीब एक हजार क्विंटल गेहूं मंडी में बिकने पहुंचा। किसनों को 1421 से 1770 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिलें।
अन्य अनाजों की आवक कम
गेहूं को छोड़कर अन्य अनाज की आवक भी काफी कम हो गई है। देशी चना 70 क्विंटल, तुअर 25 क्विंटल, मक्का की आवक 237 क्विंटल रही।

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