इंदौर हुकमचंद मिल के मजदूरों ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि वे सालों से अपने हक के लिए भटक रहे हैं। सरकार उन्हें जल्दी मुआवजा दिलावाने के बारे में कार्रवाई करे। मुआवजे के इंतजार में सैंकड़ों मजदूर दम तोड़ चुके हैं। कई की हालत गंभीर है। मजदूरों ने मिल की जमीन पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए जा रहे कब्जों को लेकर भी मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
हुकमचंद मिल की साढ़े 42 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से न्यायालय में लड़ाई चल रही है। सालों पहले हाई कोर्ट मिल की जमीन को बेचकर मजदूरों को भुगतान करने के आदेश दे चुकी है लेकिन मिल की जमीन बिक नहीं रही। नगर निगम और शासन के बीच चल रही वर्चस्व की लडाई में नुकसान मजदूरों का हो रहा है। मजदूर नेता हरनामसिंह धालीवाल और नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि पूरे मामले को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के संज्ञान में लाने के लिए उन्होंने पत्र प्रेषित किया है। इसमें कहा है कि मिल के हजारों मजदूर सालों से मुआवजे के लिए दरबदर भटक रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बावजूद मिल की जमीन बिक नहीं रही।
इधर नगर निगम की लापरवाही के चलते मिल की जमीन पर भीतर तक कब्जे हो रहे हैं। अब तक तो सडक किनारे गुमटीनुमा निर्माण किया जा रहा था लेकिन अब अतिक्रमणकारियों ने पक्के निर्माण करना शुरू कर दिया है। अतिक्रमणकारी मिल की जमीन पर पेडों को काट रहे है। हम बार-बार इस संबंध में शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसा ही चलता रहा तो मिल की जमीन बिककर मजदूरों को मुआवजा मिलने की उम्मीद भी धूमिल हो जाएगी। मजदूर नेताओं ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि मजदूर सिर्फ अपना हक चाहते हैं। जमीन आयडीए विकसित करता है या नगर निगम इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं।

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