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एक साल का हुआ महिला काव्य मंच, ऑनलाइन बही काव्य धारा

 


भोपाल महिला काव्य मंच, भोपाल के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य रविवार को ऑनलाइन माध्यम से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था 'अन्न्दाता कृषक, जाता हुआ वर्ष 2020 और शरद ऋतु"। कार्यक्रम में भोपाल के साथ-साथ अन्‍य शहरों की कवियत्रियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि साहित्यकार कुसुम श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि अरविंद शर्मा थे, जबकि अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. ज्योत्सना सिंह राजावत ने की। इस मौके पर कवयित्रियों ने दिए गए विषय पर अपनी कविताएं सुनाईं। किसानों पर आधारित पक्तियां काफी मार्मिक थीं। कार्यक्रम का संचालन प्रतिभा श्रीवास्तव ने किया।

अन्न्दाता तुम धन्य हो...

रचनाकारों द्वारा काव्य पाठ की श्रृंखला का आगाज दुर्गा रानी श्रीवास्तव ने किसान पर केंद्रित अपनी कविता से किया। उन्‍होंने जो सर्दी, वर्षा, गर्मी सहता, रात-दिन कठिन परिश्रम करता... कविता से सबकी वाहवाही बटोरी। शिल्पी सिंह बघेल ने 'अन्नादाता जग का जो सड़क पे आज है वो, ऐसी परिस्थिति भला, सामने क्यों आई है...' सुनाते हुए किसानों की व्‍यथा को बखूबी बयान किया। संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया ने 'मैं भारत देश का कृषक हूं, मैं भारत मां की सेवा करता हूं...', माया दुबे ने 'भारत के कृषक हैं महान...', नविता जौहरी ने 'शरद ऋतु का हुआ आगमन...', नीति श्रीवास्तव ने 'जाता है जो लौट कभी फिर वापस कहां आता है...', करुणा श्रीवास्तव ने 'शरद सुहावनी आ गई...', शशि बंसल गोयल ने 'तुम जा रहे हो, दो हजार बीस चले जाओ...', विद्या श्रीवास्तव ने 'अन्न्दाता तुम धन्य हो...', अनीता तिवारी ने 'तुम हो धरती का अभिमान...', वर्षा चौबे ने 'गंध-गंध महक उठी, अलियों में कलियों में...', तुहिना जोशी ने 'जाता हुआ वर्ष दो हजार बीस, अन्य सालों जैसा सामान्य नहीं...', कुसुम श्रीवास्तव ने 'कोहरे से छन-छन के भोर की किरण...', सुधा दुबे ने 'कोहरे की चादर लपेटे, सकुचाई लजाई, प्रियतम चांद से मिलकर...', शालिनी खरे ने 'जाने वाला साल दे गया अपनों की कद्र...' और महिला काव्य मंच मुरैना इकाई की जिलाध्यक्ष प्रेरणा परमार ने 'मुस्कुरा के करो इसको विदा कि ये साल सदा याद रहेगा...' सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

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