इंदौर महीनेभर से उज्जैनी-रणभंवर वनक्षेत्र में दहशत मचाने वाला तेंदुआ आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। बकरी को खाने के लालच में जैसे ही तेंदुआ पिंजरे में आया तो कुछ देर बाद दरवाजा बंद हो गया। इसके चलते तेंदुए ने बकरी का शिकार कर लिया। इसे मादा तेंदुआ होना बताया है। पिंजरे में आते ही ग्रामीणों ने तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना वन विभाग को दी। तत्काल इंदौर रेंज और रेस्क्यू टीम पहुंच गई। बाद में वनकर्मी इलाज के लिए उसे चिड़ियाघर लेकर पहुंचे।
12 नवंबर से उज्जैनी, रणभंवर टेकरी, उमरिया, कम्पेल, राजरा वनक्षेत्र की तरफ तेंदुए की मूवमेंट होना पाया। जंगल में भी वनकर्मियों ने करीब 15 दिन तक सर्चिंग की। मगर इस बीच एक बार भी तेंदुए के शिकार करने के प्रमाण नहीं मिले, लेकिन कई जगह पगमार्क और पेड़ों पर नाखूनों के निशान नजर आए। उसके आधार पर इंदौर रेंज ने पिंजरे लगाना शुरू किए। महीनेभर में करीब दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर पिंजरे लगाए है। वैसे बीते पांच दिन में तेंदुए को पकड़ने के लिए रणनीति भी बदली और पिंजरों को भी दूसरी जगह रखा। कभी पिंजरे में मुर्गा तो कभी बकरी को चारा बनाकर उसके सामने रखा। यहां तक पिंजरों को झाड़ियों से छिपाया ताकि तेंदुआ उसे आसानी से देख न सकें।
डिप्टी रेंजर टीआर हटीला ने तेंदुए को पकड़ने के लिए ग्रामीण से बकरी खरीदी। इसके लिए छह हजार रुपये दिए। रविवार को उमरिया वनक्षेत्र में पिंजरा लगा था, जिसमें तेंदुए को ललचाने के लिए बकरी बांधी थी। पिंजरे में कैद होने से पहले तेंदुए ने बकरी को मार दिया। डिप्टी रेंजर हटीला का कहना है कि तेंदुआ पूरी तरह ठीक है। इलाज के लिए चिड़ियाघर ले जाया गया है।

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