इंदौर मावठे की बारिश वैसे तो रबी की अधिकांश फसलों के लिए फायदेमंद है, लेकिन लगातार और अधिक बारिश हुई तो इससे कीड़ों और बीमारियों का भी प्रकोप हो सकता है। इन बीमारियों से बचाव के लिए उद्यानिकी विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
क्षेत्र में इस समय गेहूं, चने की कृषि फसलों के अलावा आलू, गाजर, मूली, मैथी, टमाटर, धनिया आदि उद्यानिकी फसलें भी बोई गई हैं। मावठे की अधिक बारिश हुई तो उद्यानिकी फसलों को नुकसान हो सकता है। इसमें सब्जियों की फसल के अलावा अन्य फसलें शामिल हैं। उद्यानिकी विभाग के उप संचालक टीसी वास्केल ने किसानों को सुझाव दिया है कि खेतों में पानी न भरने पाए। पानी निकाली के लिए उपयुक्त नाली बनाई जाए जिससे बारिश का अधिक पानी आने से फसलों को नुकसान न हो।
बारिश के बाद थायो यूरिया की 500 ग्राम मात्रा लेकर एक हजार लीटर पानी में उसका घोल बनाया जाए। फिर 15-15 दिन के अंतराल से इसका छिड़काव करें। प्रति एकड़ पर आठ से 10 किलो सल्फर पाउडर का बुरकाव करना भी फायदेमंद होता है। यदि फसल पर पाले का प्रभाव है तो तीन लीटर पानी में सल्फर का घोल बनाकर इस पानी का छिड़काव करना भी कारगर साबित होता है। यह कार्य बारिश रुकने के बाद किया जाना चाहिए। इन उपायों के अलावा रात के तीसरे और चौथे पहर में खेतों की मेड़ों पर कचरा और खरपतवार जलाकर इसका धुआं करना चाहिए। इससे धुएं की परत फसलों पर आच्छादित हो जाएगी। इससे तापमान के असर को नियंत्रित किया जा सकेगा। यह उपाय फसलों को बारिश या पाले से होने वाले नुकसान से बचाता है।

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