जबलपुर शहर में कोरोना इलाज की आड़ में निजी अस्पतालों में लूट मची हुई है। निजी अस्पताल संचालकों की ऐसी मोटी खाल हो गई कि वे सरकार के आदेशों का भी अंगूठा दिखाने से नहीं हिचक रहे हैं। शहर के एक निजी अस्पताल में डंके की चोट पर सिटी स्कैन के 5175 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि शासन ने तीन हजार रुपए का शुल्क तय कर दिया है।
जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए हर मरीज को सीटी स्कैन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी के साथ निजी अस्पतालों में लूट भी शुरू हो गई है। शासन स्तर पर गाइडलाइन जारी कर विभिन्न जांचों की दर निर्धारित की गई है। बावजूद सिटी अस्पताल में मरीजों से सीटी स्कैन के एवज में पांच हजार से अधिक शुल्क लिए जा रहे हैं। मनीष सैयाम नाम के मरीज से सिटी अस्पताल में शुक्रवार को 5175 रुपए सीटी स्कैन के वसूले गए।
अधिक शुल्क वसूलने के बावजूद प्रबंधन ने बोला झूठ
सिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक एसएस मोखा ने सीटी स्कैन के एवज में 5175 रुपए वसूलने की बात को सिरे से खारिज किया। बोले कि शासन का आदेश आते ही तीन हजार रुपए लिए जा रहे हैं। हालांकि मरीज का रसीद होने की बात पर चुप हो गए। जवाब नहीं सूझा तो बोले कि दिखवाते हैं ऐसा कैसे हो गया।
सीएमएचओ ने जारी किया नोटिस
वहीं कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मामला संज्ञान में लाए जाने पर सीएमएचओ डॉक्टर रत्नेश कुररिया को जांच के निर्देश दिए। सीएमएचओ ने अस्पताल को नोटिस जारी किया है। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी तय दर से अधिक शुल्क ली जा रही है तो सीएमएचओ से शिकायत करें। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
निजी अस्पतालाओं और डायग्नोस्टिक सेंटर जांच की दरें तय
- आरटीपीसीआर के लिये 700 रुपए
- रेपिड एंटीजन टेस्ट के लिये 300 रुपए
- सीटी स्कैन के लिये 3 हजार रुपए
- एबीजी. टेस्ट के लिये 600 रुपए
- डी-डाईमर टेस्ट के लिये 500 रुपए
- प्रो-कैल्सीटोनिन टेस्ट के लिये 1000 रुपए
- सीआरपी टेस्ट के लिये 200 रुपए
- सीरम फैरिटिन टेस्ट के लिये 180 रुपए
- आईएल-6 टेस्ट के लिये 1000 रुपए
- घर से सेम्पल देने पर तय दर के साथ 200 रुपए और लगेंगे
- संक्रमित बता कर इलाज किया, मौत के बाद रिपोर्ट आई निगेटिव
निजी अस्पतालों के लूट का दूसरा केस गैलेक्सी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल का है। मझौली निवासी संजय सोनी (45) को हल्का बुखार था। चार अप्रैल को वह कार ड्राइव करते हुए पत्नी के साथ अस्पताल पहुंचे। वहां अस्पताल वालों ने भर्ती कर लिया। बिना जांच रिपोर्ट के ही बोल दिए कि वे कोविड संक्रमित हैं। उन्हें कोविड वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। पांच अप्रैल काे चिकित्सकों ने कोई इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। अस्पताल प्रबंधन ने दो लाख रुपए जमा करा लिए। इस बीच उन्हें परिजनों से नहीं मिलने दिया।
हार्ट अटैक से मौत
सात अप्रैल की सुबह 11 बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों ने रिपोर्ट आने तक बॉडी रखने के लिए अस्पताल प्रबंधन से कहा, बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने कोविड गाइडलाइन के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करा दिया। नौ अप्रैल को परिजनों के पास कोविड-19 कॉल सेंटर से बताया गया कि संजय सोनी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उनकी मौत की वजह हार्ट-अटैक बताया जा रहा है।

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