इंदौर, चौबीस घंटे पहले भले ही पच्चीस हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप प्रदेश में पहुंच चुकी है। मगर दवा बाजार की दुकानों में अभी इंजेक्शन गायब है। अस्पताल के लिए तो प्रशासन ने इंजेक्शन बुलाए हैं, लेकिन दुकानों में रेमडेसिविर की सप्लाय सामान्य नहीं हुई है। यही वजह है कि कोरोना से पीड़ित मरीजों का जीवन बचाने के लिए स्वजनों की मशक्कत कम नहीं हुई है। इंजेक्शन पाने के लिए एक से दूसरी दुकान में स्वजन भटकने को मजबूर हैं। बावजूद इसके उनके हाथ खाली है। मरीजों के स्वजनों का गुस्सा अब प्रशासन पर जमकर फूट रहा है। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन सिर्फ बड़े अस्पताल में भर्ती मरीजों का ध्यान रखने में लगे है।
बीते दिनों दवा बाजार की एकमात्र दुकान से बिक रही रेमडेसिविर अब यहां भी उपलब्ध नहीं है। क्वालिटी ड्रग हाऊस ने भी इंजेक्शन नहीं होने का पर्चा चिपका दिया है। फिर भी मरीज इंजेक्शन की तलाश में दुकान पर पहुंच रहे है। संचालक मधुर का कहना है कि इंजेक्शन अभी दुकानों को नहीं दिए जा रहे है। प्रतिदिन हर घंटे कई लोग रेमडेसिविर इंजेक्शन मांगने आ रहे हैं।
प्रशासन से दुकानदारों ने इंजेक्शन की सप्लाय के लिए बोला है। मगर अधिकारियों की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। लक्ष्मी मेडिकल के संचालक राम पाटीदार ने बताया कि अस्पताल में इंजेक्शन पहुंच चुके है। बावजूद इसके कई लोग डाक्टर की पर्ची लेकर दवा दुकानों में घूम रहे है। रोजाना बीस-पच्चीस लोग को मना करना पड़ रहा है।
इंजेक्शन के लिए भटक रहा बेटा
निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा रहे पिता को संक्रमण से बचाने के लिए सुदामा नगर के मयंक जैन दवा दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। मयंक का कहना है कि चार दिन से पिता अस्पताल में भर्ती हैं। शनिवार को जैसे-तैसे दो इंजेक्शन की व्यवस्था की। डाक्टरों द्वारा लगाने के बाद दोबारा सोमवार को इंजेक्शन बुलवाया है। दवा बाजार की हालत देखकर इंजेक्शन के इंतजाम में दोस्तों की मदद ली है। मगर अभी तक कोई एक भी इंजेक्शन नहीं मिला है। राऊ निवासी विनय पांडे बताते है कि चाचा को मामूली बुखार हुआ। टेस्ट करवाने पर पॉजिटिव आए। तुरंत अस्पताल लेकर आए तो डाक्टरों ने इंजेक्शन लगाने का कहा। दो दिन पूरा परिवार रेमडेसिविर पाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।

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