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इंसानियत शर्मसार:जिस हिन्दू महिला का शव बेटी को मजबूरी में अकेले दफनाना पड़ा, उसी के श्राद्ध में भोज खाने पहुंच गए 150 लोग

अररिया (बिहार) 

लेखक: प्रभांशु रंजन, मुरली दीक्षित



श्राद्ध में भोज खाने पहुंचे गांव वाले।
  • गांव वाले बोले- हम तो संबल देने आए हैं
  • अररिया में कोरोना का हॉट-स्पॉट बन चुके मधुलता में अब तक 35 संक्रमित हुए, चार की मौत

ये है कोरोनाकाल की दो तस्वीर। पीपीई किट पहने एक लड़की अकेले ही मां के शव को दफनाने पर मजबूर हुई थी। भास्कर ने इस तस्वीर को प्रकाशित भी किया था। तब गांव वाले इस कदर खौफ में थे कि उन्होंने कंधा देना भी मुनासिब नहीं समझा। लेकिन आज 10 दिन बाद इस महिला के श्राद्धकर्म में तकरीबन 150 लोग भोज में शामिल होने पहुंच गए।


10 दिन पहले की तस्वीर, जब बेटी ने मां को अकेले दफनाया था।


 अररिया में कोरोना का हॉट-स्पॉट बन चुके विशनपुर पंचायत के मधुलता निवासी ग्रामीण चिकित्सक बीरेन मेहता की बेटी (सोनी) की थी। अभी सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस गांव में 35 संक्रमित है। सर्दी-खांसी के भी कई मरीज है।

पंचायत के मुखिया सरोज कुमार मेहता ने बताया कि मैं खुद संक्रमित हूं। लेकिन हमारे गांव में करीब 800 से 900 लोग भोज खाने आते हैं। डॉक्टर साहब और उनकी पत्नी की मौत के बाद रोते-बिलखते बच्चों को संबल देने के लिए गांव के करीब 150 लोग उनके दरवाजे पर पहुंचे थे।

श्राद्धकर्म के अगले ही दिन ग्राउंड रिपोर्ट करने जब भास्कर की टीम मधुलता पहुंची, तो पता चला कि डॉक्टर की बड़ी बेटी सोनी अपने चचेरे भाई के साथ बैंक से पैसा निकालने गई थी। भास्कर टीम के आने की सूचना पर वह आधे रास्ते से वापस लौट आई।

गांव के उपमुखिया प्रतिनिधि लक्ष्मी पासवान ने बताया कि बीते 15 दिनों में दो ग्रामीण चिकित्सक सहित चार लोगों की मौत कोरोना से हुई है। इसके अलावा अन्य बीमारियों से ग्रसित तीन बुजर्गों की मौत भी सांस संबंधी परेशानी से हुई है।

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