दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित होने के बाद सैंकड़ों लोग जान गवां चुके हैं। इस बीच मन को झकझोर देने वाले कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जब जिंदगी के आखिरी दौर में अपनों ने ही साथ छोड़ दिया। कोरोना संक्रमित होने का ऐसा डर कि मरीज की जिला अस्पताल में मौत के बाद अंत्येष्टि तक कराने के लिए आने को तैयार नहीं हुए। कुछ लोग तो शव को लावारिस छोड़कर चले गए। यह हाल तब हैं जब संक्रमित की मौत पर प्रशासन ही कोविड गाइड लाइन से अंत्येष्टि करवा रहा है।
श्योपुर जिले की एक महिला को उसका पति जिला अस्पताल शिवपुरी में भर्ती कराकर लावारिश छोड़कर घर लौट गया। मौत होने पर पति के इंतजार में महिला का शव आठ दिन तक फ्रिजर में रखा रहा। प्रशासन ने पत्राचार करके पति को बुलवाया और उसके सामने अंत्येष्टि कराई। इसी तरह पिता की मौत के बाद बेटा बुलवाने पर बमुश्किल मुक्तिधाम पहुंचा। दूर से पिता का चेहरा देखा और कर्मचारी से कहकर मुखाग्नि दिलवा दी। गुना जिले की बुजुर्ग मां की मौत के बाद बेटा आने तैयार नहीं हुआ। पुलिस की मदद से बातचीत हुई ताे कहने लगा कि आप तो जला आओ, हम मृत्यु प्रमाण प़त्र ले आएंगे। समझाने पर रिश्तेदारों के संग शिवपुरी आया और अंत्येष्टि कराई।
संक्रमण का ऐसा डर... 3 ऐसे मामले जिसमें अंत्येष्टि के लिए अपनों ने दूरियां बना लीं
मां को अस्पताल में छोड़ गया, मौत का बताया तो कहा- आप जला दोगुना जिले के देहरावदा निवासी गुड्डी (65) पत्नी कल्याण चिड़ार को उसके बेटे ने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। 23 मई की देर शाम गुड्डी की मौत हो गई। बेटे को अस्पताल परिसर में ढूंढा गया तो वह नहीं मिला। इसके बाद शव को फ्रिजर में रखवाना पड़ा। पुलिस 24 मई को गांव पहुंची और परिजन को मौत के बारे में बताया। फोन पर बात हुई तो बेटे ने कहा- आप तो जला आओ, हम मृत्यु प्रमाण पत्र आकर ले जाएंगे। हालांकि समझाने के बाद 25 मई को बेटा व दो अन्य रिश्तेदार शिवपुरी आए, तब मुक्तिधाम पर अंत्येष्टि कराई गई।
पत्नी की मौत, दो बार पत्राचार तब 8 दिन बाद घर से आया पतिश्योपुर जिले के कुम्हार मोहल्ला निवासी चंद्रकला (50) पत्नी सनमान मंगल को जिला अस्पताल शिवपुरी में इलाज के लिए भर्ती कराया। पत्नी को यहां छोड़कर पति घर चला गया। 22 अप्रैल को पत्नी की मौत हुई तो परिजन काे खोजना शुरू किया। कोई नहीं मिला तो शव को पीएम हाउस के फ्रिजर में रखवाना पड़ा। पता ढूंढकर श्योपुर प्रशासन के माध्यम से पति सनमान मंगल से संपर्क किया। श्याेपुर प्रशासन से दो बार पत्राचार के बाद सनमान मंगल अंत्येष्टि कराने शिवपुरी आए। इस दौरान अंत्येष्टि के इंतजार में पत्नी का शव आठ दिन फ्रिजर में रखा रहा।
बुलवाने पर बमुश्किल आया बेटा, काफी दूर खड़ा रहाशहर के मनियर निवासी 45 साल के बबलू जाटव को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। उनका कोई भी परिजन खैर खबर लेने के लिए नहीं था। इलाज के दौरान बबलू की 23-24 अप्रैल की रात मौत हो गई। परिजन को तलाशा तो कोई नहीं मिला। पुलिस की मदद से बुलवाने पर बमुश्किल बेटा आया और मुक्तिधाम पर साथ गया। इस दौरान वह काफी दूर खड़ा रहा। मुखाग्नि देने से उसने मना कर दिया। शव लेकर गए कर्मचारी से कहा कि आप ही मुखाग्नि दे दो। नगर पालिका के एक कर्मचारी ने आखिरी समय में पिता का चेहरा दिखाया और खुद ही मुखाग्नि दी।
मई के 26 दिन में कोविड प्रोटोकॉल से 148 अंत्येष्टिजिला अस्पताल और जीएमसी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 1 मई से 26 मई तक मरीजों की मौतें होने के बाद 148 अंत्येष्टि कोविड गाइड लाइन के तहत कराई गईं हैं जबकि सामान्य 202 अंत्येष्टि हुई हैं। वहीं अप्रैल में काेविड प्रोटोकॉल से 81 और सामान्य 209 अंत्येष्टियां हुईं थीं, यानी अप्रैल की तुलना में मई महीने में अधिक मौतें हुईं हैं।
शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत झलवासा में दलित परिवार पर हुए…
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