इंदौर नमक-ग्लूकोज से तैयार नकली रेमडेसिविर मरीजों की नसों तक पहुंचाने वाले 29 गुनहगार इंदौर पुलिस की गिरफ्त में हैं। गुजरात तक जाल फैलाए इन जान के दुश्मनों के नेटवर्क का भंडाफोड़ इंदौर पुलिस ने 26 अप्रैल को किया था। कोरोना के पीक में जब मरीज अस्पतालों में सांसें गिन रहे थे, तब इस गिरोह के सरगना सूरत के मोरबी इलाके में एक फार्महाउस में जीवनरक्षक माने जा रहे रेमडेसिविर को सिर्फ 80 रुपए में तैयार कर 35 से 40 हजार रुपए तक वसूलकर मरीजों की नसों में पहुंचा रहे थे।
इन इंजेक्शन के लगने से अब तक 10 जानें जाने की पुष्टि इंदौर पुलिस कर चुकी है, और भी मौतें हुई होंगी, लेकिन पीड़ित सामने नहीं आने से खुलासा नहीं हुआ है। जानलेवा इस गिरोह ने सिर्फ 15 दिन में नकली इंजेक्शन से 2 करोड़ 94 लाख 60 हजार रुपए कमाए। आरोपी 5 दिन में 1 करोड़ कमाने की बात पुलिस के सामने कबूल चुके हैं। अब तक इंदौर पुलिस 5 प्रकरण दर्ज कर 29 आरोपियों को पकड़ चुकी है।
ऐसे हुआ राजफाश इंदौर में सुनील की गिरफ्तारी के बाद सामने आया पूरा गिरोह
पूछताछ में आरोपी कौशल ने पुलिस को बयान दिए कि शुरुआत के इंजेक्शन बेचने से उन्हें 5 दिन में ही 1 करोड़ के करीब राशि आई तो उन्होंने 1 लाख वायल तैयार कर और नकली इंजेक्शन तैयार करने की प्लानिंग कर ली थी, लेकिन इंदौर से सुनील गिरफ्तारी होते ही कौशल और पुनीत भी गुजरात पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
एसपी आशुतोष बागरी के मुताबिक पुलिस ने पहला केस दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनसे मिली लिंक के बाद 9 आरोपी और पकड़े। इसके बाद सूरत के ड्रग माफियाओं से जुड़े इंदौर के मुख्य सरगना सुनील मिश्रा को ट्रैक किया। सुनील से पता चला इंदौर में बिकने आए 1200 रेमडेसिविर इंजेक्शन नकली हैं।



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