Music

BRACKING

Loading...

मप्र में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना, मार्च के पहले अनाथ हुए 1000 बच्चों को नहीं मिलेगा फायदा



 भोपाल मप्र में 1 मार्च 2020 से अब तक 1250 बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए बनाई मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि इस योजना का लाभ केवल 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 के बीच मृत अभिभावक के बच्चों को ही दिया जा रहा है। बाल कल्याण योजना के दायरे में अब तक मात्र 250 बच्चे ही आ पाए हैं। मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना के तहत प्रदेश में 1 मार्च 2021 से 30 जून के बीच अनाथ हुए हर बच्चे को प्रतिमाह 5 हजार रुपए देना शुरु कर दिया गया है।

इसमें शर्त यह है कि या तो इस अवधि में माता-पिता दोनों की कोविड से मौत हुई हो, या दोनों में से किसी एक की मृत्यु पहले हो चुकी हो और दूसरे की मृत्यु इस अवधि में हुई हो। भले ही यह मौत कोविड से नहीं हुई हो, तो भी ऐसे अनाथ बच्चों को इस योजना में शामिल कर लिया गया है। मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से ऐसे 178 बच्चों के खातों में 5-5 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। प्रदेश में इस योजना के लिए अब तक 243 आवेदन सरकार के पास पहुंचे हैं।

बच्चों से भेदभाव क्यों :1 मार्च 2021 के पहले अनाथ बच्चों को हर महीने 2000 रु. और बाद वालों को 5000 रुपए
महिला एवं बाल विकास विभाग के एक सर्वे के अनुसार 1 मार्च, 2021 से पहले कोरोना के कारण लगभग 1,000 बच्चे अनाथ हुए हैं। कुछ जिलों में ऐसा सर्वे अभी नहीं हुआ है। वहां ऐसे बच्चों को स्पांसरशिप स्कीम और फास्टर केयर योजना के तहत एक साल तक 2000 रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया है।

हाल में सतना जिले में इस योजना के 9 प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि कोविड के दौर में ही अनाथ हुए बच्चों के लिए एक जैसी योजना क्यों नहीं बनाई गई? एक तिथि के पहले मृत लोगों के बच्चों के लिए सिर्फ 2000 रुपए प्रतिमाह और 1 मार्च 2021 के बाद मृत लोगों के बच्चों के लिए 5000 रुपए प्रतिमाह देने और शिक्षा की संपूर्ण व्यवस्था करना योजना में विसंगति को उजागर कर रहा है।

 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ