शिवपुरी यह लो सहमति पत्र और अपने पिताजी से इस पर हस्ताक्षर करवा कर लेकर आओ कि उन्हें, तुम्हें स्कूल भेजने में कोई परेशानी तो नहीं है। जब तक यह सहमति पत्र आप स्कूल में जमा नहीं करेंगे तब तक हम तुम्हें स्कूल की कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देंगे। यह बात लंबे अरसे बाद खोले सरकारी विद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे कक्षा 12 के स्कूली छात्रों से प्राचार्य ने कही। इसके बाद छात्र अगले दिन स्कूल आने की बात कहकर घर वापस चले गए।
दरअसल सरकार द्वारा सरकारी स्कूल खोलने को लेकर जो एस ओपी जारी की है उसमें स्पष्ट उल्लेख किया है कि स्कूल में छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने से पहले उनके अभिभावकों से लिखित सहमति पत्र लिया जाए कि उन्हें स्कूल भेजने में कोई परेशानी नहीं है।
सहमति इसलिए कहीं कोरोना काल के चलते संक्रमण फैला तो परिजन यह आरोप न लगाने लगे कि बच्चा स्कूल से संक्रमण लेकर आया है और वह उनकी सहमति से स्कूल नहीं गया। इस वजह से ऐहतियात बतौर यह सहमति पत्र विद्यार्थियों से लिया जा रहा है।
खास बात यह है कि शहर के उत्कृष्ट विद्यालय में ही जब इक्का-दुक्का छात्र कक्षा 12 की पढ़ाई करने स्कूल पहुंचे तो अन्य ग्रामीण क्षेत्र में इनकी उपस्थिति के क्या हाल रहे होंगे इसका आकलन सहज ही किया जा सकता है। कुल मिलाकर पहले दिन स्कूल आने में छात्र छात्राओं ने कोई रुचि नहीं दिखाई और जो छात्र आए भी वह सहमति पत्र लेकर नहीं आए। इस वजह से उन्हें सहमति पत्र लाकर क्लास टीचर को जमा कराने के निर्देश प्राचार्य ने दिए।
यहां यह मिले हालात
उत्कृष्ट विद्यालय में कुछ छात्र-छात्राएं कक्षा में पढ़ाई करने के लिए आए, लेकिन सहमति पत्र न होने से उन्हें वापस घर भेज दिया गया। प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल में सहमति पत्र की अनिवार्यता है इसके साथ ही हमने कक्षाओं को सेंसेटाइज करा लिया है।
मास्क की अनिवार्यता पहले से ही लागू है। यहां छात्र छात्राओं को सेनेटाइजर मशीन से सेनेटाइजर लेते हुए अवश्य देखा गया हालांकि कुछ छात्र पढ़ने के मूड से रोचकता के साथ आए थे पर सहमति पत्र न होने से वह जाते समय निराश दिखे।
शहर के सदर बाजार स्थित स्कूल में एक भी छात्र कक्षा 12 का पढ़ाई करने नहीं पहुंचा। यहां के प्राचार्य एनके जैन से जब स्कूल ना आने वाले विद्यार्थियों के बारे में जानकारी ली तो वह बोले कि पहला दिन है बच्चों तक सूचना तो पहुंचाई थी लेकिन कोई आया नहीं।+
हालांकि हमने बच्चों को सहमति पत्र दे दिए हैं जिन पर अभिभावक के हस्ताक्षर करा कर उन्हें लेकर आना है। स्कूल में व्यवस्था के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमने रोस्टर वॉ इज कक्षाओं का निर्धारण कर दिया है और क्लास में शिक्षकों को क्या पढ़ाना है, कैसे पढ़ाना है इस संबंध में उनको दैनंदिनी बुक भी दे दी है।
शहर के कोर्ट रोड स्थित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ की उपस्थिति तो दिखी, लेकिन छात्र इक्का-दुक्का ही नजर आए पहले दिन जो छात्राएं आईं उन्हें सहमति पत्र देकर रवाना कर दिया गया। उनसे कहा गया कि वह सहमति लेकर ही आएं तभी उन्हें कक्षा में प्रवेश मिलेगा।
अनुमति लाने को कहा है
हम स्कूल गए थे, पढ़ाई का पहला दिन था इसलिए मूड में थे कि कुछ अच्छा पढ़कर आएंगे, लेकिन हमसे स्कूल में कहा गया कि पहले सहमति पत्र लेकर आएं और अभिभावक की सहमति आने पर ही कक्षा में बैठ सकेंगे। अब पिताजी से अनुमति लाएंगे। अखिल शर्मा, छात्र कक्षा 12 उत्कृष्ट विद्यालय शिवपुरी
सहमति लाना जरूरी
विद्यार्थियों को अभिभावक की सहमति लाना अनिवार्य है। इस तरह की एस ओपी जारी हुई है। जिसके तहत सभी प्राचार्य को पहले उनकी अनुमति लेना है इसके बाद विद्यार्थी को पढ़ाई के लिए कक्षा में बैठाना है इसलिए हमने सबसे अनुमति मंगाई है। जहां तक सुरक्षा की बात है तो हमने सेनेटाइजर मास्क और दूरी से बिठाने के पूरे इंतजाम कर लिए हैं। विवेक श्रीवास्तव, प्राचार्य उत्कृष्ट विद्यालय शिवपुरी

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