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गुना : बेटे ने छोड़ दिया, छलका मां का दर्द...:बाढ़ में सूखी जगह छोड़ने का कहकर मां को भेज दिया रैन बसेरा; आंखों से नहीं दिखता, कागज देकर चली गई बहू

 

                                                 रैन बसेरा में मायूस बैठी कपूरी को अपनों का इंतजार।

'मैं बच्चों के साथ ही रहती थी। बारिश हुई, तो सबने कहा कि इसे सूखे में छोड़ आओ, इसलिए यहां आ गई। घर में पानी भर गया। दीवारें गिर गईं। घर के पटिए गिर गए। पूरा कच्चा मकान है। दो घर गिर गए। अब बच्चे वहीं दूसरे घर में हैं। वहीं बना लेते होंगे खाना। अब मैं तो देखने नहीं गई। क्या करते हैं, क्या नहीं। एक मकान पर तो पन्नी डालकर बचाया था।

यह कहानी है शहर के जज्जी बस स्टैंड पर बने रैन बसेरे में 4 दिन से रह रही 75 साल की कपूरी बाई की। कपूरी बाई को दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता। वह कोल्हूपुरा में रहती थीं। उनके दो घर हैं। एक बेटा है, जो मजदूरी करता है। उसकी शादी हो चुकी है। दो बच्चे हैं। 5 दिन पहले हुई मूसलधार बारिश में बाढ़ जैसी स्थिति बनी और उसका भी घर गिर गया। अब बेटे और पोतों ने भी मुंह मोड़ लिया। सिसोदिया कॉलोनी में रहने वाली समाजसेविका महिला को रैन बसेरे में छोड़ गई। तब से वह यहीं रह रही हैं। उनके पास बस एक थैली है, जिसमें कुछ कागज हैं।


                                6 अगस्त की बारिश में इस तरह घरों में भरा था पानी।

5 दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश ने कई परिवारों को तबाह कर दिया। शहर में ही 600 से ज्यादा घर आपदा में गिर गए। वहीं, हजारों घर ऐसे थें जिनमें कई फीट तक पानी भर गया। कुछ लोग अब उन्हीं टूटे घरों में आसरा तलाश रहे हैं। कुछ लोग जिनके घर पूरी तरह टूट चुके हैं, वे रिश्तेदारों या रैन बसेरे में रहने को मजबूर हैं। दैनिक भास्कर ने रैन बसेरा पहुंचकर लोगों से उनकी आपबीती जानी।

अपनी दास्तां सुनाते हुए कपूरी बाई भावुक हो उठीं। उनका कहना था कि इतने दिनों से न बेटा देखने आया और न बहू। बारिश का फायदा उठाकर उसे यहां छोड़ दिया गया। एक दिन केवल बहू मिलने आई। वह भी कागज देकर चली गई। जो महिला उसे यहां छोड़कर गई, वह उसे भी नहीं जानती। कोल्हूपुरा में स्कूल के बगल में घर था। बारिश वाले दिन बेटे और बहू ने कहा कि हम खाना खाने चलते हैं।

उसके बाद एक महिला ने उसे रैन बसेरा में छोड़ दिया। अब उसे यह भी पता नहीं कि उसके बच्चे कहां हैं। रैन बसेरा के प्रभारी का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत महिला को टायलेट और बाथरूम की है। अभी तो दूसरी महिलाएं यहां हैं, तो वो मदद कर देती हैं, लेकिन जब ये चले जाएंगी, तो क्या होगा। कई बार बेटे को बुलाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं आया।

बहू के ऊपर ही गिर गई दीवार
इसी रैन बसेरे में दूसरी तरह तीन महिलाएं और कुछ बच्चे दिखे। वहां मौजूद रशीद कॉलोनी की निवासी प्रेम बाई ने बताया कि सब लोग घर में थीं। इस कॉलोनी में 6 अगस्त को हुई बारिश में घरों और सड़कों पर 5-5 फीट तक पानी भर गया था। खाने की तैयारी कर रहे थे। उसके दो बच्चे हैं। दोनों हाथ ठेला चलाने का काम करते हैं। 10-12 लोगों का परिवार है। सभी एक साथ ही रहते हैं। जिस दिन बारिश शुरू हुई, सभी लोग साथ थे। दोनों बेटे काम पर गए थे। तभी खाना बना रही बहू के ऊपर दीवार गिरी। मोहल्ले वालों ने उसे बाहर निकाला। अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी कमर में चोट आई है। प्लास्टर चढ़ा हुआ है।

                       रशीद कॉलोनी की प्रेमबाई की बहू के ऊपर दीवार गिरने से उसकी कमर में फ्रैक्चर हो गया।
पानी तेज हुआ तो पूरा ही घर गिर गया। पूरा घर कच्चा था। दो कमरे बने थे। नगरपालिका वाले पहुंचे तो ट्रैक्टर में सबको लाकर यहां छोड़ा गया। पूरा सामान दब गया। बरसते हुए पानी में सब लेकर आए। न तो एक पैसा है अब हमारे पास। बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं। एक जोड़ी कपड़े में ही सब यहां आ गए। अब पहनने को तक कपड़े नहीं हैं। पूरा ही घर गिर गया, तो अब उसे देखने भी नहीं गए। सभी छोटे बच्चों के साथ यहीं रह रहे हैं। यहां खाना तो मिल जाता है। काफी समय से कुटीर के लिए आवेदन दिया हुआ है, लेकिन वह भी स्वीकृत नहीं हुई। न ही हमारे पास राशन कार्ड है।


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