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शिवपुरी : सौ करोड़ से पाँच करोड़ मैं तब्दील गमन , पुलिस ने किया मामला दर्ज

जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की कोलारस शाखा में प्रारंभिक जांच के बाद दो शाखा प्रबंधक और कैशियर पर एफआईआर दर्ज


 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी की कोलारस शाखा में गबन की प्रारंभिक जांच में कैशियर और दो शाखा प्रबंधकों के खिलाफ शनिवार को पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। प्रारंभिक जांच में 12 महीने में ही 5.31 करोड़ का गबन सामने आया है, जबकि भोपाल का दल शाखा में कई साल में हुए गबन की जांच कर रहा है।
सीसीबी शाखा कोलारस के वर्तमान शाखा प्रबंधक जनार्दनसिंह तोमर ने शनिवार को कोलारस पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने कोलारस शाखा के तत्कालीन कैशियर राकेश कुमार पाराशर और तत्कालीन शाखा प्रबंधक ज्ञानेंद्रदत्त शुक्ला व रमेश कुमार राजपूत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। 3 अगस्त 2020 से 15 जुलाई 2021 तक 5 करोड़ 31 लाख 51 हजार 444 रु. बैंक से निकालकर खुद ही उपयोग कर लिया। दरअसल यह रकम सीसीबी शाखा कोलारस से निकालकर एसबीआई खाते में जमा करने के नाम पर निकाली गई, लेकिन एसबीआई खाते में यह राशि जमा नहीं कराई। यह राशि कई बार में निकाली गई है।
कैशियर के साथ दोनों शाखा प्रबंधक जिम्मेदार, इसलिए केस दर्ज
  • 5.31 करोड़ के गबन में कैशियर के संग दोनों शाखा प्रबंधक जिम्मेदार हैं इसलिए तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। दरअसल सॉफ्टवेयर में एंट्री के वक्त दो पासवर्ड रहते हैं, जिसमें पहला कैशियर और दूसरा ब्रांच मैनेजर का रहता है। इसी तरह लॉकर से पैसे निकालने के लिए भी दो चाबी रहती हैं, जिसमें पहली कैशियर और दूसरी मैनेजर के पास रहती है। एक-साथ चाबी लगाने पर ही कैश निकाला जाता है। बिना मैनेजर की सहमति के इतनी मोटी रकम का गबन मुमकिन नहीं है।
  • कोलारस शाखा में एक साल की प्रारंभिक जांच में ही 5.31 करोड़ का घपला सामने आया है, जबकि इससे पहले आठ से दस साल के गबन की भी जांच चल रही है इसलिए घपला 30 से 40 करोड़ के आसपास होने का कयास लगाया जा रहा है। जांच दल भी कुछ स्पष्ट नहीं कर रहा है।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों से नौकरी कर रहे ऑपरेटर, कोई कार्रवाई नहीं
सीसीबी शिवपुरी की शाखाओं में एमपीकोन के जरिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों से कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की गईं। मामला उजागर होने क बाद भी सीसीबी शिवपुरी के अधिकारी मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। शाखाओं में गबन की जांच के बहाने फर्जी ऑपरेटरों को अभी तक नहीं हटाया। इससे अधिकारी खुद भी शक के दायरे में नजर आ रहे हैं।
सालों से चल रहे गमन का खुलासा सिर्फ 5 करोड़ में ही तब्दील हुआ  गवमन  के मामले मैं जिले में चल रही अफवाह को लेकर जनाधार निराश यह मामला अब लोकायुक्त  में जाना चाहिए जनप्रतिनिधि लगाएंगे गुहार  

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