की ड्रॉ, केबीसी, ओटीपी, वेरीफिकेशन और फिसिंग लिंक- साइबर फ्रॉड के यह तरीके अब पुराने हो चुके हैं। अब आम लोग भी ठगी के ऐसे तरीकों से बचने के तरीके जान चुके हैं। इसी के चलते साइबर फ्रॉड करने वाले शातिर ठगों ने ठगी के नए तरीके इजाद कर लिए। ठगी के चार नए तरीके, जिनसे अब सबसे ज्यादा ठगी हो रही हैं। सिर्फ एक क्लिक पर पलभर में लोगों के खाते खाली हो रहे हैं, यहां तक कि फिंगरप्रिंट की भी क्लोनिंग की जा रही है। लोगों को इस बारे में पता ही नहीं है और वह ठगे जा रहे हैं।
रिमोट लॉगइन...यह ठगी का नया तरीका है, इसमें तकनीकि जानकार ठग सक्रिय हैं। देश के किसी भी कोने में बैठकर आपका मोबाइल हैक कर यह ठगी की जा रही है। ठग किसी भी बहाने से एक लिंक मोबाइल पर भेजते हैं, इस पर सिर्फ एक क्लिक करते ही एप्लीकेशन इंस्टॉल हो जाता है। इसके जरिए ठग रिमोट आईडी हैक कर लेते हैं, फिर मोबाइल पूरी तरह से ठगों के नियंत्रण में आ जाता है। मोबाइल में उपलब्ध बैंकिंग संबंधी डाटा हासिल कर बैंक खाता ही ठग खाली कर रहे हैं।
- ऐसे बचें:अनजान एसएमएस, लिंक पर क्लिक न करें, कॉल पर अगर कोई एप डाउनलोड करने को कहे तो न करें।
सेक्सटॉर्शन पिछले करीब छह माह में सेक्सटॉर्शन के जरिए ठगी का चलन बढ़ा है। इसमें दिल्ली, हरियाणा की गैंग सबसे ज्यादा सक्रिय है। युवकों से लेकर अधेड़ उम्र के व्यक्ति इसके जरिए ठगे जा रहे हैं। इसमें बाकायदा एक युवती की फेक आईडी के जरिए सोशल मीडिया अकाउंट पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। इसके बाद अश्लील वीडियो चैटिंग शुरू की जाती है। इसे स्क्रीन रिकॉर्डर एप के जरिए रिकॉर्ड कर लिया जाता है। फिर इसी वीडियो को भेजकर ब्लैकमेलिंग की जाती है।
- ऐसे बचें:सोशल मीडिया अकाउंट पर किसी अनजान की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। किसी अनजान का वीडियो कॉल न उठाएं, चैटिंग से बचें।
एईपीएस...एईपीएस यानि आधार इनेवल पेमेंट सिस्टम, इस सिस्टम में ठगों ने सेंध लगा दी है। इसमें आधार कार्ड में उपलब्ध फिंगरप्रिंट को क्लोन कर लिया जाता है। फिंगरप्रिंट का डाटा डार्क वेब पर बिक भी रहा है। इसके जरिए फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर बैंक से ठग पैसे निकाल रहे हैं। फिंगरप्रिंट को हासिल करने बैंक, आधार सेंटर, बायोमैट्रिक मशीन लगाने वाली कंपनियों, रजिस्ट्रार ऑफिस में उपलब्ध डाटा को डार्क वेब के जरिए खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
- ऐसे बचें: यूआईडीआई की वेबसाइट पर जाकर आधार कार्ड के फिंगरप्रिंट को लॉक किया जा सकता है। इससे बैंक अकाउंट सुरक्षित रहता है।
गेमिंग...वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेस जब से शुरु हुईं, तब से गेमिंग की लत लगाकर ठगी की घटनाएं बढ़ी हैं। इसमें गेम एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिंक आती है, सोशल मीडिया पर इसके शॉर्ट वीडियो और डाउनलोड की लिंक उपलब्ध है। बच्चे सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसमें एक साथ चार से पांच लोग तक खेलते हैं, साथ ही हार-जीत के दांव भी लगाते हैं। बच्चे अपने माता-पिता के खाते से गेम को लिंक कर देते हैं। इसके बाद खाता खाली होता चला जाता है। ऐसे मामले ग्वालियर में बढ़े हैं।
- ऐसे बचें:जब भी बच्चे कोई गेम खेलें तो उन पर नजर रखें। नेट बैंकिंग अगर इस्तेमाल करते हैं तो बच्चों के हाथ में मोबाइल न थमाएं।
ठगों को पकड़ने के लिए टीम बनाई है
एपीईएस, गेमिंग, रिमोट लॉगइन- यह ठगी के नए तरीके हैं, जिनके प्रति लोग जागरूक नहीं हैं। अब सबसे ज्यादा इसी तरह ठगी हो रही हैं। हम लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जागरूक अभियान भी चला रहे हैं। ऐसे ठगों को पकड़ने के लिए टीम बनाई हैं, जो पड़ताल में लगी हैं।
-सुधीर अग्रवाल, एसपी, राज्य सायबर सेल

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