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वन स्टॉप सेंटर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 


शिवपुरी,  राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशन में एवं प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री विनोद कुमार के मार्गदर्शन में गतदिवस वन स्टॉप सेंटर शिवपुरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
शिविर में पॉस्को एक्ट, पीढित प्रतिकर, बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं, मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएं, गरीबी उन्मूलन, नशा पीढ़ितों के लिए विधिक सेवाएं, कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं की शिक्षा एवं रोजगार, लैंगिक समानता, ऑनर किलिंग, लिंग परीक्षण एवं जांच निवारण अधिनियम एवं निःशुल्क विधिक सहायता योजना के संबंध में जनसामान्य को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्रीमती शिखा शर्मा द्वारा पीढ़ित प्रतिकर योजना के बारे में बताया कि यदि किसी अपराध से पीढित व्यक्ति जिसकी हत्या हो गई हो या शरीर में 40 प्रतिशत से अधिक स्थायी निशसक्तता हो गई हो तो उसके आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रतिकर प्रदान किया जाता है, इसके अतिरिक्त बलात्कार, अवयस्क बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराध अथवा एसिड अटैक से कुरुपता होने पर भी पीढिता को प्रतिकर राशि प्रदान की जाती है इसी के साथ-साथ वर्तमान में युवा पीढी तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रही है, जिससे उसका सामाजिक एवं नैतिक पतन तो होता ही है वरन उसके स्वास्थ्य पर भी अत्यंत विनाशकारी प्रभाव पड़ते हैं। नशे के कारण परिवार का नाश होने लगे तो नशा त्यागने के लिये सबसे पहले आत्मविश्वास होना आवश्यक है, उसके उपरांत जिला चिकित्सालय, शिवपुरी में स्थापित नशा मुक्ति केन्द्र पर निःशुल्क उपलब्ध दवाओं का सेवन करके नशे की लत छुडाई जा सकती है, उक्त केन्द्र में निःशुल्क काउंसलिंग भी की जाती है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री सुनीता देवी कोरी द्वारा बताया गया कि गर्भ में पौषित बच्चे के लिंग का परीक्षण करवाना एवं भ्रूण हत्या करना दोनों दण्डनीय हैं। कन्या भ्रूण हत्या घृणित कार्य होने के साथ-साथ देश के विकास में भी बहुत बड़ी बाधा है, जहां महिलाएं देश के विकास में आधा योगदान देती हैं वहां गर्भ में ही बालिका की हत्या कर देने से महिलाओं का अनुपात कम हो रहा है वहीं दूसरी ओर बालिकाओं का आत्म विश्वास भी कम होता है।
पॉक्सो एक्ट के बारे में बताया गया कि इस अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों जिसमें बालक एवं बालिका शामिल हैं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध के लिये दण्ड का प्रावधान है जिसमें न्यूनतम 10 वर्ष का कारावास एवं अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही उपस्थित महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के संबंध में भी अपील की गई तथा बताया कि सरकारी नौकरी के अतिरिक्त भी करियर बनाने के कई विकल्प उपलब्ध है, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार आजीविका मिशन के अंतर्गत लड़कियों को निःशुल्क सिलाई, ज्वैलरी मेकिंग, ब्यूटीशियन इत्यादि के कोर्स कराये जाते हैं, जिसमें प्रशिक्षण पाकर महिलाएं स्वयं का बिजनेस कर सकती हैं।

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