5 सर्वार्थ और 1 रवि पुष्य योग में खरीदारी भी रहेगी शुभ।
चैत्र नवरात्रि में इस साल 5 सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग होने के कारण यह नवरात्रि विशेष फलदायी हो गई हैं। इस बार तिथि का क्षय न होने की वजह से नवरात्रि पूरे नौ दिन की होगीं। रामनवमी को रवि पुष्य योग घटित होगा, इसकी वजह से देवी और श्री राम की आराधना विशेष फल देगी।
सर्वार्थ सिद्धि और रवि पुष्य योग होने की वजह से नवरात्र में प्रॉपर्टी, व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, वस्त्र, आभूषण की खरीदारी करना शुभ होगा। खरमास समाप्त होने के बाद 15 अप्रैल से सहालग हैं, ऐसे में नवरात्रि में बाजारों में रौनक रहने की उम्मीद है।
ज्योतिषाचार्य पं. विजय भूषण वेदार्थी के अनुसार नूतन संवत्सर के साथ ही चैत्र शुक्ल पक्ष बसंत नवरात्रि घटस्थापन चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन किया जाता है। प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 1 अप्रैल शुक्रवार सुबह 11.54 बजे से हो जाएगा। यह तिथि दूसरे दिन दोपहर 11.58 बजे तक रहेगी। 2 अप्रैल शनिवार प्रतिपदा तिथि सूर्योदय व्यापिनी होने के कारण नवरात्रि विधान का प्रारंभ शनिवार से होगा।
चैत्र नवरात्रि में किसी भी तिथि की घट-बढ़ नहीं होने के कारण नवरात्रि का पर्व नौ दिन का रहेगा। विशेष बात यह है कि नवरात्रि का समापन एवं रामनवमी महोत्सव रवि पुष्य योग में मनाया जाएगा। रवि पुष्य योग को विशेष शुभ एवं मुहूर्तराज के नाम से भी जाना जाता है। 10 अप्रैल रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय होने तक रहने के कारण रवि पुष्य योग की अवधि 24 घंटे की रहेगी। चैत्र नवरात्रि में 5 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग होने के कारण नवरात्रि का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
इन दिनों में रहेंगे सर्वार्थ सिद्धि योग
3 अप्रैल सुबह 6.31 से दोपहर 12.38 बजे तक, 5 अप्रैल सुबह 6.28 से 7 अप्रैल सुबह 6.26 बजे तक, 6 अप्रैल शुक्रवार रात 1.42 से सुबह 6.24 बजे तक और 10 अप्रैल सुबह 6.23 से दूसरे सुबह 6.50 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेंगे। इन नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग की अधिकता एवं रवि पुष्य योग में की गई मां भगवती की आराधना शीघ्र मनोरथों को सिद्ध करने वाली मानी जाती है। रवि पुष्य योग वैदिक विधि से देवी की उपासना एवं भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव के साथ राम रक्षा स्त्रोत का पाठ एवं किसी संकल्प सिद्धि के लिए की गई तांत्रिक आराधना विशेष शुभ फलदायी रहती है।
खरीदारी के याेग और सहालग 15 से इसलिए बाजारों में रहेगी रौनक
चैत्र नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि पुष्य योग वाहन, भूमि, भवन, आभूषण, वस्त्र आदि की खरीदारी के लिए श्रेष्ठ रहेंगे, लेकिन इस समय मीन राशि में सूर्यदेव का भ्रमण होने से खरमास चल रहा है। जिसके कारण नूतन गृह प्रवेश, नूतन गृह निर्माण, देव प्रतिष्ठा व विवाह जैसे मांगलिक कार्य के मुहूर्त नहीं बनेंगे। खरमास समाप्त होने के बाद विवाह के मुहूर्त रहेंंगे ऐसे में जिन घरों में विवाह आयोजन हैं वह नवरात्रि में बाजारों में खरीदारी करने के लिए निकलेंगे, ऐसे में बाजारों में रौनक रहेगी।
ये हैं घट स्थापन के शुभ मुहूर्त
सुबह 7.42 से 9.14 बजे तक शुभ बेला, दोपहर 12.08 से 1.40 बजे तक चंचल बेला, दोपहर 1.40 से 3.12 बजे तक लाभ बेला, दोपहर 3.13 से शाम 4.44 बजे तक अमृत बेला, दोपहर 11.55 से 12.43 बजे अभिजीत मुहूर्त रहेगा। उपर्युक्त शुभ मुहूर्तों में घट स्थापन कर देवी की आराधना प्रारंभ करना विशेष शुभ फलदायी रहेगी

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