Music

BRACKING

Loading...

घरेलू हिंसा में स्थाई शारिरिक क्षति होने पर पीड़ित महिला को मुआवजे का प्रावधान

 ब्रज रावत
 महिलाओं पर होने वाली हिंसाओं में एक घरेलू हिंसा है, जिसका ग्राफ अन्य हिंसाओं की तुलना में काफी अधिक है। हर तीसरी- चौथी महिला घर के भीतर प्रताड़नाएं झेलती है। इस हिंसा को अधिकांश महिलाएं चुपचाप सहन करतीं रहतीं है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण कानून में इस प्रकार की हिंसा से पीड़िता को संरक्षित करने के लिए व्यापक प्रावधान है, उसके बाद भी जागरूकता के अभाव और घर टूटने के डर से महिलाएं आगे नहीं आतीं।
अनेकों बार इस अपनों के हिंसात्मक व्यवहार से महिलाओं स्थाई शारीरिक क्षति हो जाती है। राज्य सरकार ने घरेलू हिंसा पीड़िता के लिए सहायता योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अब महिला या बालिका को किसी अंग की स्थाई क्षति के फलस्वरूप 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता पर 2 लाख तथा 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता पर 4 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। अब तक इस प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं था।

- यह होगी आवेदन की प्रक्रिया
इस मुआवजे के लिए पीड़ित या उसके आश्रित की ओर से घटना के एक वर्ष के भीतर संबंधित क्षेत्र के महिला एवं बाल विकास के परियोजना अधिकारी (संरक्षण अधिकारी) अथवा प्रशासक वन स्टॉप सेंटर को आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ घटना की एफआईआर प्रति संलग्न करना आवश्यक होगा। मेडिकल बोर्ड शारिरिक क्षति का आंकलन कर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति को प्रतिवेदन देगा, जिसके आधार पर समिति द्वारा मुआवजे की स्वीकृति दी जाएगी।

- यात्रा खर्च भी मिलेगा
पीड़ित के शारिरिक क्षति होने पर गंतव्य स्थल तक आने जाने तथा न्यायालयीन कार्यवाही विचाराधीन रहने तक सार्वजनिक परिवहन की प्रचलित दरों के अनुसार यात्रा खर्च भी दिया जाएगा। इस योजना का लाभ राज्य की निवासी महिलाओं एवं बालिकाओं को ही मिल सकेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ