मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि को लेकर शासन की अधिसूचना पर हाई कोर्ट की रोक
याचिका पीथमपुर औद्योगिक संगठन और मप्र टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश पटवर्धन, कीर्ति पटवर्धन पैरवी कर रहे हैं।
मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि को लेकर शासन की अधिसूचना पर हाई कोर्ट की रोक
मजूदरी में वृद्धि को लेकर नोटिफिकेशन पर स्टे।
सरकार के नोटिफिकेशन पर हाईकोर्ट का स्टे।
मजूदरों की न्यूनतम मजूदरी में वृद्धि मामले में अगली सुनवाई तक रोक।
अगली सुनवाई 21 मई तय की है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि को लेकर शासन द्वारा चार मार्च 2024 को जारी अधिसूचना पर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर स्थित युगलपीठ ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह रोक इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए प्रस्तुत एक याचिका की सुनवाई करते हुए लगाई है।
अदालत ने मांगा जवाब
याचिका पीथमपुर औद्योगिक संगठन और मप्र टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश पटवर्धन, कीर्ति पटवर्धन पैरवी कर रहे हैं। याचिका में कहा है कि इस अधिसूचना के क्रियान्वयन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका के अंतिम निराकरण तक अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने शासन से इस संबंध में जवाब मांगा था।
21 मई को होगी अगली सुनवाई
हाल ही में हुई सुनवाई में शासन की तरफ से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकारते हुए अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। अगली सुनवाई 21 मई को होगी।
गौरतलब है कि औद्योगिक एवं असंगठित श्रमिकों को अधिक मजदूरी मिल सके। इसके लिए राज्य शासन ने चार मार्च 2024 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें औद्योगिक और असंगठित क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित सभी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में एक अप्रैल 2024 से बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2014 के बाद से यह पहला मौका है जब राज्य में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाया गया है। याचिका में इस अधिसूचना को ही चुनौती दी गई है।

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