कार्यक्रम की अध्यक्षता वुमेंस असोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती वंदना सिंह ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि नवरात्रि का पर्व माँ दुर्गा की आराधना और नारी-शक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि, माँ दुर्गा की उपासना और शक्ति साधना का पर्व है। डांडिया और गरबा नृत्य, शक्ति की आराधना के प्रतीक माने जाते हैं। डांडिया की छड़ी माँ दुर्गा के त्रिशूल का प्रतीक है, जो असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है। वहीं, गरबा नृत्य माँ शक्ति की ज्योति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके चारों ओर भक्त मंडल की भाँति घूमते हैं। यह सामूहिकता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक एकता का सुंदर संदेश देता है। डांडिया और गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजन हमें परंपराओं से जोड़ते हैं और समाज में सामूहिकता एवं ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होने इस अवसर पर गरबा/डँड़िया के महत्व को बताते हुए कहा कि गरबा और डांडिया केवल सांस्कृतिक नृत्य नहीं, बल्कि देवी माँ की ऊर्जा का प्रतीकात्मक उत्सव है। गोल घेरे में नृत्य करना ब्रह्मांडीय शक्ति (Cosmic Energy) के निरंतर चक्र का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि हम सभी देवी माँ की शक्ति से जुड़े हैं।
इस अवसर पर महिला संघ की सदस्य – मधुरी पटनायक, तुलिका श्रीवास्तव, डॉ. रितु तिवारी, डॉ. अनुराज सिंह, दीपा सिंह सिसोदिया, जेनकिंस सूजी, आरती, गरिमा, ऋचा, ज्योति, पलक, अमृता, सुषमा और शिप्रा ने गरबा और डांडिया की मनमोहक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी सदस्यों ने जब गरबा और डँड़िया की धुन पर गोल घेरा बनाकर नृत्य किया तो पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से गूंज उठा।
संगीत, नृत्य और माँ दुर्गा के जयकारों से सजे इस आयोजन ने नवरात्रि पर्व को और भी भव्य बना दिया। उपस्थित दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
अंत में, सभी सदस्यों ने माँ दुर्गा से संस्थान की उन्नति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। कार्यक्रम सफल आयोजन और उल्लासपूर्ण वातावरण के लिए सभी सदस्यो की सराहना की गई। कार्यक्रम का समापन गरबा और डांडिया की ताल पर उत्साहपूर्वक हुआ और सभी ने मिलकर नवरात्र महोत्सव का आनंद लिया। इस अवसर पर पूरे परिसर में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह जानकारी संस्थान की मीडिया प्रभारी श्रीमती दीपा सिंह सिसोदिया के द्वारा दी गयी।


0 टिप्पणियाँ