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Shivpuri News : शिवपुरी में हाई-वोल्टेज ड्रामा: न्याय के लिए पानी की टंकी पर चढ़े दो युवक : पुलिस पर गंभीर आरोप, पुलिस ने बताया 'बदमाश है '!



 शिवपुरी। व्यवस्था से परेशान होकर जब आम आदमी के सामने सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तो वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज और हाई-वोल्टेज ड्रामा आज शिवपुरी जिले के मनियर बाईपास पर देखने को मिला। यहाँ दो युवक अपनी मांगों को लेकर पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए और आत्महत्या की कोशिश करने लगे। देखते ही देखते बाईपास पर सैकड़ों लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गये 

प्रताड़ित – पीड़ित पक्ष का पुलिसिया सिस्टम पर बड़ा प्रहार

जब हमने पूरे मामले को जानने के लिए टंकी पर चढ़े युवकों से उनकी इस नाराजगी की असली हकीकत जाननी चाही, तो पुलिसिया कार्यप्रणाली की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। 

जानकारी देते हुये प्रताड़ित पक्ष ने बताया कि बीती 26-27 तारीख को मेरा ट्रैक्टर चोरी हो गया था। मैं अपने पूरे परिवार को लेकर थाने के चक्कर काट-काट कर थक गया, लेकिन साहबों ने मेरी रिपोर्ट तक नहीं लिखी। न्याय देना तो दूर, पुलिस ने उल्टा मुझ पर ही धारा 151 ठोक दी और मुझे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया! जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो हमें अपनी जान दांव पर लगानी पड़ी।

 हम आप को बता दे की टंकी पर चढ़े युवकों की पहचान अकेश धाकड़ और सतेंद्र धाकड़ (निवासी: ग्राम दुलारा) के रूप में हुई है।

 पुलिस का पलटवार: "ये पीड़ित नहीं, बीमा कंपनी को चूना लगाने वाले व छेत्र के शातिर बदमाश हैं"

इस पूरे बवाल पर जब पोहरी पुलिस का पक्ष सामने आया, तो कहानी पूरी तरह पलट गई। पुलिस ने युवकों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें इलाके का 'बदमाश करार दिया। पोहरी पुलिस का साफ कहना है कि 

ये लोग सीधे-साधे लोगों को बदमाशी कर फ़सा लेते है फिर परेशान करते है ! 

ऐन वक्त पर सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, पर सुलगते सवाल बरक़रार

टंकी पर मचे इस बवाल से प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए थे। लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस टीम—एसआई (SI) अंजली जी दीवान रघुवीर बघेल और संतोष ने मोर्चा संभाला। टीम ने बेहद सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए टंकी पर चढ़े युवकों से बात की। युवकों की शर्त मानते हुए पुलिस ने जब निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट लिखने का लिखित/ठोस आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर दोनों युवकों को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।

सुलगते सवाल 

अब क्षेत्र में यह मामला भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि अगर युवक वाकई बदमाश हैं, तो पुलिस ने पहले उन पर कार्यवाही  क्यों नहीं की? और अगर युवक सच्चे हैं, तो चोरी की रिपोर्ट लिखने के बजाय पीड़ित को ही जेल भेजने का तुगलकी फरमान क्यों सुनाया गया? फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले के दोनों पहलुओं की गहराई से तफ्तीश कर रही है।


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