इंदौर में खाकी का अहंकार और मनमानी एक बार फिर भारी पड़ी है। एरोड्रम थाने में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आने के बाद शहर की राजनीति और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा और थाना प्रभारी (TI) समेत कुल 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
घटना के मुख्य बिंदु
- थाने के भीतर बर्बरता का आरोप: शुक्रवार रात करीब 11 बजे भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे और जयदीप दुबे किसी मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने एरोड्रम थाने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि उन्हें घसीटकर थाने के अंदर ले गए और उनके साथ मारपीट की।
- सड़कों पर उतरा राजनीतिक आक्रोश: घटना की खबर मिलते ही स्थानीय विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एरोड्रम थाने के बाहर जमा हो गए। उन्होंने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को आधार बनाकर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़ गए।
- प्रशासन का बड़ा एक्शन: थाने के बाहर बढ़ते हंगामे और भारी गहमागहमी के बीच एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए पुलिस प्रशासन ने देर रात त्वरित कार्रवाई करते हुए एरोड्रम थाना प्रभारी, एसआई, एएसआई सहित कुल 7 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। इसके बाद ही माहौल शांत हो सका।
- विशेष टिप्पणी: यह घटना एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है कि यदि थाने के भीतर पुलिसकर्मी ही आम नागरिकों या राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का बर्बर और गैर-कानूनी रवैया अपनाएंगे, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद किससे की जा सकती है? खाकी की इस मनमानी पर केवल निलंबन नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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