एक रात पहले साथ बैठकर खाना खाया, फिर अगले ही दिन ज़मीन और फसल के लालच में बहा दिया सगे खून का रिश्ता; क्या समाज से खत्म हो चुकी है मानवीय संवेदना?
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शिवपुरी / कोलारस: कहते हैं कि भाई-भाई का रिश्ता दुनिया में सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन जब रिश्तों पर ज़मीन और संपत्ति के लालच का अंधकार छा जाता है, तो इंसान जानवर से भी बदतर हो जाता है। ऐसी ही एक रूह कंपा देने वाली दिल दहलाने वाली घटना शिवपुरी जिले के कोलारस थाना क्षेत्र के रिजौदा गांव से सामने आई है, जहाँ ज़मीन के विवाद और मक्के की फसल के बंटवारे को लेकर सगे बड़े भाई ने अपने ही छोटे भाई के सिर पर कुल्हाड़ी मारकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि समाज में गहराते उस कलयुगी यथार्थ की ओर इशारा करती है जहाँ चंद बीघा ज़मीन और चंद रुपयों की फसल के आगे खून के रिश्ते पूरी तरह बौने और बेमानी हो चुके हैं।
रात में साथ खाया खाना, सुबह कुल्हाड़ी से उतारा मौत के घाट
घटना की जानकारी के अनुसार, रिजौदा गांव निवासी चंद्रभान उर्फ चंदा रघुवंशी (34 वर्ष) और घनश्याम रघुवंशी (26 वर्ष) सगे भाई थे। दोनों के बीच काफी समय से ज़मीन को लेकर विवाद चल रहा था। करीब छह महीने पहले ज़मीन का बंटवारा हो गया था, लेकिन खेत में बोई गई मक्के की फसल का बंटवारा बाकी था।
मृतक घनश्याम अविवाहित था और अपनी मां के साथ गुना में रहता था, क्योंकि बड़े भाई का अपनी मां से भी विवाद रहता था। मक्के की फसल के बंटवारे के सिलसिले में घनश्याम गुरुवार को रिजौदा गांव आया था।
विश्वास का घोर उल्लंघन तो यह है कि गुरुवार की रात घनश्याम ने अपने बड़े भाई चंद्रभान के घर पर ही खाना खाया और वहीं रुका। लेकिन शुक्रवार की सुबह जब दोनों भाई खेत पर मक्के की फसल का बंटवारा करने पहुंचे और घनश्याम ट्रैक्टर पर बैठा था, तभी चंद्रभान ने पीछे से आकर कुल्हाड़ी से उसके सिर पर जानलेवा वार कर दिया। हमले में घनश्याम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
पुलिस कार्यवाही और फरार आरोपी की तलाश
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी चंद्रभान मौके से फरार हो गया। कोलारस थाना प्रभारी पुनीत बाजपेयी के अनुसार, शुरुआती जांच में हत्या का मुख्य कारण ज़मीन और फसल का विवाद सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। शुक्रवार शाम पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
कलयुग का कड़वा सच
ज़मीन का टुकड़ा यहीं रह जाएगा, पर हत्या का यह पाप इंसानियत को शर्मसार कर गया।
एक ही मां की कोख से जन्मे दो भाइयों में से एक की लाश बिछ गई और दूसरा पुलिस के डर से भगोड़ा बन गया। क्या चंद क्विंटल मक्के की फसल या ज़मीन का एक टुकड़ा किसी इंसान की जिंदगी और सगे रिश्ते से ज्यादा कीमती हो सकता है? यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिकता और भौतिकता की अंधी दौड़ में समाज किस दिशा में जा रहा है, जहाँ लालच और क्रोध के आगे भाई ही भाई का काल बन रहा है।
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