'तिरछी नजर'
सुशासन से कुशासन बाबू तक
श्रीगोपाल गुप्ता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत योग्य और अल्प मगर जरुरत पर ही बोलने वाले नेता माने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से पहली मर्तबा सन् 2000 में बिहार की राजगद्दी पर विराजमान नीतीश को अच्छे शासक के तौर पर देश और बिहार में सुशासन बाबू के नाम से जाना जाता है। सुशासन बाबू बोले तो?.... राज्य में सब कुछ ठीक-ठाक और चुरुस्त-दुरुस्त सुशासन का राज चारो तरफ खुशहाली ही खुशहाली। तीन मर्तबा भाजपा के कंधों पर और आखरी बार लालु की जनता दल की छाती पर सवार होकर कुल छठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश के बारे में अब सुशासन बाबू का तमगा अब पुराना हो चला है या फिर कहा जा सकता है कि ये बीते जमाने की बात हो गई है। कम से कम बिहार पुलिस ने बीते साल के मात्र 10 महिने का अपराधों का जो लेखा-जोखा पेश किया है वो तो यही साबित कर रहा है। पुलिस ने जनवरी 18से अक्टूबर 18 तक के जो आंकड़े पेश किये हैं, उसके अनुसार बिहार में हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, अपहरण, जैसे गंभीर अपराध रोजमर्रा के काम हो गये हैं। आंकड़ों के अनुसार बिहार में प्रति दिन 8 मर्डर, 4 बलात्कार और 30 दंगे हो रहे हैं। करीब 85 घरों में रोज चोर अपने हाथ साफ कर रहे हैं। इतना ही नहीं सड़कों पर चलने वाले लोग भी कतई सुरक्षित नहीं हैं,लगभग। 4 लोगों साथ लूट की घटनाएं सरेआम हो रही जबकि प्रत्येक दिन 29 अपहरणों की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। बिहार पुलिस के खौफजदा आंकड़ों के अनुसार बिहार में साल 2018 के 10 महिनों में हत्या के कुल 2522 के मामले दर्ज किये गये। जनवरी में जहां 178 मामले तो अक्टूबर में 227 मामले दर्ज हुये। इसी तरह चोरी के कुल 25472 मामले दर्ज हुये हैं। राज्य मे वर्ष 2018 के 10 महिनों में दंगो की कुल घटनाएं 8989 हुई। अपहरण की वारदातों में बिहार पीछे नहीं है, 10 महिनों में अपहरण के 8804 मामले प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज हुये हैं। बलात्कार में भी बिहार पीछे नहीं है जनवरी 18 से लेकर अक्टूबर 18 तक बलात्कार की कुल घटनायें 1304 दर्ज हुई हैं। इन आंकड़ों के सामने आने पर बिहार ही पूरा देश नीतीश जी पूछ रहा है कि सुशासन बाबू ये कैसा सुशासन है? जिसमें न नर और न नारी और न ही माल मुरब्बत सुरक्षित नहीं है।जब नीतीश जनता दल और महागठबंधन के साथ 2015 में चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने थे, तब वे बात-बात पर अपराध और भ्रष्टाचार पर लालू की राष्ट्रीय जनतादल पर ईशारा कर देते थे। मगर अब तो उनकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी है, ऐसे में उन्हें सुशासन का राज्य स्थापित करने से कोन रोक रहा है?नीतीश जी अपनी मजबूत सुशासन बाबू की इमेज की तरह बिहार में सुशासन का राज पुनः स्थापित करने का प्रयास करिये,इसमें बिहार और देश की जनता आपके साथ खड़ी है.............
सुशासन से कुशासन बाबू तक
श्रीगोपाल गुप्ता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत योग्य और अल्प मगर जरुरत पर ही बोलने वाले नेता माने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से पहली मर्तबा सन् 2000 में बिहार की राजगद्दी पर विराजमान नीतीश को अच्छे शासक के तौर पर देश और बिहार में सुशासन बाबू के नाम से जाना जाता है। सुशासन बाबू बोले तो?.... राज्य में सब कुछ ठीक-ठाक और चुरुस्त-दुरुस्त सुशासन का राज चारो तरफ खुशहाली ही खुशहाली। तीन मर्तबा भाजपा के कंधों पर और आखरी बार लालु की जनता दल की छाती पर सवार होकर कुल छठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश के बारे में अब सुशासन बाबू का तमगा अब पुराना हो चला है या फिर कहा जा सकता है कि ये बीते जमाने की बात हो गई है। कम से कम बिहार पुलिस ने बीते साल के मात्र 10 महिने का अपराधों का जो लेखा-जोखा पेश किया है वो तो यही साबित कर रहा है। पुलिस ने जनवरी 18से अक्टूबर 18 तक के जो आंकड़े पेश किये हैं, उसके अनुसार बिहार में हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, अपहरण, जैसे गंभीर अपराध रोजमर्रा के काम हो गये हैं। आंकड़ों के अनुसार बिहार में प्रति दिन 8 मर्डर, 4 बलात्कार और 30 दंगे हो रहे हैं। करीब 85 घरों में रोज चोर अपने हाथ साफ कर रहे हैं। इतना ही नहीं सड़कों पर चलने वाले लोग भी कतई सुरक्षित नहीं हैं,लगभग। 4 लोगों साथ लूट की घटनाएं सरेआम हो रही जबकि प्रत्येक दिन 29 अपहरणों की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। बिहार पुलिस के खौफजदा आंकड़ों के अनुसार बिहार में साल 2018 के 10 महिनों में हत्या के कुल 2522 के मामले दर्ज किये गये। जनवरी में जहां 178 मामले तो अक्टूबर में 227 मामले दर्ज हुये। इसी तरह चोरी के कुल 25472 मामले दर्ज हुये हैं। राज्य मे वर्ष 2018 के 10 महिनों में दंगो की कुल घटनाएं 8989 हुई। अपहरण की वारदातों में बिहार पीछे नहीं है, 10 महिनों में अपहरण के 8804 मामले प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज हुये हैं। बलात्कार में भी बिहार पीछे नहीं है जनवरी 18 से लेकर अक्टूबर 18 तक बलात्कार की कुल घटनायें 1304 दर्ज हुई हैं। इन आंकड़ों के सामने आने पर बिहार ही पूरा देश नीतीश जी पूछ रहा है कि सुशासन बाबू ये कैसा सुशासन है? जिसमें न नर और न नारी और न ही माल मुरब्बत सुरक्षित नहीं है।जब नीतीश जनता दल और महागठबंधन के साथ 2015 में चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने थे, तब वे बात-बात पर अपराध और भ्रष्टाचार पर लालू की राष्ट्रीय जनतादल पर ईशारा कर देते थे। मगर अब तो उनकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी है, ऐसे में उन्हें सुशासन का राज्य स्थापित करने से कोन रोक रहा है?नीतीश जी अपनी मजबूत सुशासन बाबू की इमेज की तरह बिहार में सुशासन का राज पुनः स्थापित करने का प्रयास करिये,इसमें बिहार और देश की जनता आपके साथ खड़ी है.............

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