Music

BRACKING

Loading...

मजदूरों के मसीहा थे जॉर्ज फर्नांडिस

मजदूरों के मसीहा थे जाॅर्ज फर्नाडिस

                श्रीगोपाल गुप्ता

प्रख्यात समाजवादी और देश के पूर्व रक्षामंत्री जाॅर्ज फर्नाडिस मजदूरों के मसीहा थे, जिन्होने विश्व की सबसे दबंग महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आपातकाल में सबसे ज्यादा छकाया और लगातार फरार रहे। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गये आपातकाल का जमकर विरोध करने वाले जाॅर्ज फर्नाडिस के जीवन की कहानी उस वाॅलीवुड की फिल्म की कहानी के समान है जिसमें होरो घर छोड़कर हीरो बनने के लिए अपना शहर छोड़कर बाॅम्बे की तरफ भागता है। ठीक बुंबाईया फिल्म की तरह जाॅर्ज माता-पिता के द्वारा मैंगलोर से बैंगलोर पादरी की पढ़ाई करने के लिए सन् 1946 में भेजते हैं।मगर जाॅर्ज बैंगलोर में दो साल रहने के पश्चात ही सन् 1949 में बम्बई भाग जाते हैं, फिर शुरु होता है वाॅलीवुड की फिल्म की तरह उनकी सच्ची कहानी का आरंभ। दिनभर बम्बई की सड़कों पर घूमने के बाद चौपाटी के किनारे पर लगी कुर्सियों पर लेटकर रात बिताने का सिलसिला, मगर यहां भी फिल्म की तरह गहरी रात्री में अक्सर पुलिस कांस्टेबलों द्वारा धकियाना। फिर आधी रात में उठना और आगे-पीछे जाकर दूसरी कुर्सी पर सोना। मगर फिल्मी कहानी से इतर ये सच है कि जाॅर्ज ने बैंगलोर फिल्म का हीरो बनने के लिए नहीं छोड़ा था। आखिर उनकी मंजिल तो देश के राजनीतिक क्षीतिज में प्रथम पंक्ति में जगह बनाना था।जो उन्होने भारी संघर्ष के बाद देश की करीब तीन गैर कांग्रेसी सरकारों में मंत्री बनकर बनाने में सफलता प्राप्त की थी। आखिरकार बम्बई में उन्हें प्रुफ रीडींग की नोकरी मिल गई, जिससे उनका वो चौपाटी के किनारे कुर्सियों पर सोना और पुलिस कांस्टेबलों द्वारा अर्ध रात्रियों में जगाकर भगाने का सिलसिला बंद हो गया।जल्दी ही जाॅर्ज बम्बई टेक्सी युनियन के अध्यक्ष बन गये और उन पर समाजवादी आंदोलन और प्रखर समाजवादी नेता डाॅ. राम मनोहर लोहिया का प्रभाव पढ़ चुका था। उनकी पहली बड़ी अग्नी परीक्षा सन् 1967 में हुई। जब देश की चौथी लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गई थी। बाॅम्बे साऊथ से कांग्रेस के उम्मीदवार थे दिग्गज नेता सदाशिव कानोजी पाटिल जिन्हें बाॅम्बे का बेताज बादशाह कहा जाता था और उनका कद तब बाल ठाकरे के समान था। चार बार के बाॅम्बे के मेयर रह चुके पाटिल का बाॅम्बे साऊथ जीतना लगभग तय था। मगर उनके विरुद्ध जाॅर्ज ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से फार्म भरा। जब परिणाम आये तो जार्ज ने 48.5 फीसदी वोट लाकर सबको चकीत कर दिया और उन्होने सदाशिव कानोजी पाटिल को उनके ही घर बाॅम्बे साऊथ पटकनी दे दी।

इसके साथ ही उनका दबंग प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से टकराव शुरु हो गया। क्योंकि सदाशिव कानोजी पाटिल को इंदिरा जी का बदहस्त प्राप्त कहा जाता था। टकराव तब और बढ़ गया जब जाॅर्ज फर्नाडिस सन् 1973 में आॅल इंडिया रेल्वे मैंस युनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये और उन्होने रेलवे के मजदूरों के वेतन वृद्धि की मांग इंदिरा गांधी सरकार से कर दी। मगर जब सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया तो मई सन् 1974 में जाॅर्ज ने रेलवे की हड़ताल शुरु कर दी। हालात इतने बदतर हो गये कि जैसे तकरीबन एक महिने के लिए भारत ठहर सा गया था, पूरा रेल संचालन ठप्प हो गया। रेलवे मजदूर जिन्हे, टैक्सी और ट्रांसपोर्ट मजदूर यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त हो गया था,हजारों की संख्या में अपने परिवारों के साथ पटरी पर बैठ गये और पूरा भारतीय रेलवे संचालन ठप्प कर दिया। ट्रैन जहां की तहां खड़ी की खड़ी रह गई। दिल्ली में बैठी सरकार को सेना की मदद लेनी पढ़ी, सेना ने ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था अपने हाथों में ले ली, मगर सफलता आंशिक ही मिल पाई। हालांकि हड़ताल बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई। इधर जब इंदिरा जी देश में आपातकाल झोंक दिया तो सबसे ज्यादा परेशान उन्हें जाॅर्ज ने ही किया। तमाम प्रयासों के बावजूद जाॅर्ज सरकार की पकड़ में ही नहीं आ रहे थे, बल्कि वे अपने साथियों के साथ इंदिरा जी सही रास्ते पर लाने के लिए उनकी सभाओं में जिलेटिन की मदद से धमाका करने की योजना बना रहे थे। अंततः योजना की जानकारी का भंडाफोड़ हो गया और पुलिस ने फर्नाडिस सहित कुल 25 लोगों पर देशद्रोह और सरकार का तख्ता पलट का केस दर्ज कर गिरफ्तारी शुरु कर दी। अंततः फर्नाडिस भी 10 जून 1976 को कलकत्ता से गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल की समाप्ती पर जाॅर्ज फर्नाडिस ने जेल में रहकर ही बिहार के मुजफ्फरपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा। जिसके प्रचार कार्य के लिए भी उन्हे जमानत नहीं दी गई थी। मगर उन्हें अपना नेता मान चुकी मुजफ्फरपुर की जनता ने अपने पैसों व वोट से बहुमत से रिकार्ड मतों से जिताया। इसके बाद वे मोरार जी देशाई की जनता पार्टी सरकार उधोग मंत्री बने और उन पर लगे सारे इल्जामात वापिस लिये गये। इसक

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ