प्रमुख सचिव योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री अनिरूद्ध मुखर्जी ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा के क्षेत्र में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों में मॉनीटरिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। विशेष रूप से जिला स्तरीय मॉनीटरिंग की प्रभावी विधियाँ विकसित करने की जरूरत है। श्री मुखर्जी प्रदेश में वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये बनी कार्य-योजना के प्रारूप पर विमर्श संबंधी कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से वैश्विक, राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में स्थानीय चुनौतियों का आंकलन करने में सहायता मिलेगी।
सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जी.) वर्ष 2030 तक गरीबी के सभी आयामों को समाप्त करने और सबके लिए एक समान, न्यायपूर्ण और सुरक्षित विश्व की सृष्टि के लिए जनवरी 2016 से प्रभाव में आया एक समझौता है।
यू.एन.डी.पी. द्वारा होटल अशोका लेक व्यू में की गई कार्यशाला में यूनाईटेड नेशन्स डेव्हलपमेंट प्रोग्राम (यू.एन.डी.पी.) यूनाईटेड नेशन्स के एशिया पेसेफिक रीजनल ब्यूरो के निदेशक श्री हाओलिंग जू , यू.एन.डी.पी. की भारत प्रतिनिधि सुश्री फ्रेंसिंन पिकअप सहित विभिन्न विकास एजेंसियों के प्रतिनिधि, अधिकारी तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे। श्री हाओलिंग जू ने स्थानीय स्तर पर प्रभावी योजनाओं के क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत के नवाचार अन्य देशों के लिए भी प्रेरक रहे हैं। कार्यशाला में पाँच तकनीकी सत्र में क्रमश: गरीबी और खाद्य सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य- स्वच्छता व बसाहटें, गुणवत्ता शिक्षा, लैंगिक समानता व सामाजिक न्याय, औद्योगिक नवाचार और अधोसंरचना आदि पर संबंधित अधिकारियों तथा विषय-विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जी.) वर्ष 2030 तक गरीबी के सभी आयामों को समाप्त करने और सबके लिए एक समान, न्यायपूर्ण और सुरक्षित विश्व की सृष्टि के लिए जनवरी 2016 से प्रभाव में आया एक समझौता है।
यू.एन.डी.पी. द्वारा होटल अशोका लेक व्यू में की गई कार्यशाला में यूनाईटेड नेशन्स डेव्हलपमेंट प्रोग्राम (यू.एन.डी.पी.) यूनाईटेड नेशन्स के एशिया पेसेफिक रीजनल ब्यूरो के निदेशक श्री हाओलिंग जू , यू.एन.डी.पी. की भारत प्रतिनिधि सुश्री फ्रेंसिंन पिकअप सहित विभिन्न विकास एजेंसियों के प्रतिनिधि, अधिकारी तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे। श्री हाओलिंग जू ने स्थानीय स्तर पर प्रभावी योजनाओं के क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत के नवाचार अन्य देशों के लिए भी प्रेरक रहे हैं। कार्यशाला में पाँच तकनीकी सत्र में क्रमश: गरीबी और खाद्य सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य- स्वच्छता व बसाहटें, गुणवत्ता शिक्षा, लैंगिक समानता व सामाजिक न्याय, औद्योगिक नवाचार और अधोसंरचना आदि पर संबंधित अधिकारियों तथा विषय-विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
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