कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि सोयाबीन के अच्छे उत्पादन के लिए एक बार खेती गहरी जुताई अवश्य कराएं। इसके उपरांत खेत को बख्खर, कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत को तैयार कर दें। खेत की अंतिम बख्खरनी के पूर्व गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर 10 टन अथवा मुर्गी की खाद प्रति हेक्टेयर ढाई टन की दर से खेत में डालकर फैला दें। अपने क्षेत्र के लिए अनुसंशित सोयाबीन किस्मों में से उपयुक्त किस्म का चयन कर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करें। बोनी के समय आवश्यक उर्वरक, खतपरवार नाशक, फफूंद नाशक, जैविक कल्चर आदि का उपयोग करें। पीला मोजिक बीमारी की रोकथाम के लिए अनुसंशित कीटनाशक से बीजों का उपचार करें। वर्षा के आगमन पश्चात् सोयाबीन की बोनी मध्य जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह में कर लेना चाहिए। नियमित मानसून के उपरांत 4 इंच बारिश होने के बाद बोनी करना उचित होता है।

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