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फर्जी मुठभेड़ कांड की विभागीय जांच कराने की तैयारी

गुना. सात साल पूर्व धरनावदा थानांतर्गत चिलका पहाड़ी पर किरण पारदी और सुनील पारदी मुठभेड को कोर्ट ने संदिग्ध माना है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी थी। इस फर्जी मुठभेड़ को लेकर पुलिस प्रशासन ने विभागीय जांच कराने की तैयारी कर ली है।
इस जांच में धरनावदा पुलिस थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी नरेन्द्र भार्गव पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है। वहीं इस सारी घटना की सत्यता जानने के लिए डीआईजी के आदेश पर पोहरी के तत्कालीन डा. एसएन मुखर्जी तस्दीक करने गुना आए थे। जबकि प्रांरभिक विवेचना और बयान की कार्रवाई तत्कालीन थाना प्रभारी नरेन्द्र भार्गव ने स्वयं की थी। वहीं इस पूरे मामले को लेकर आरोपी पक्ष के परिजन जल्द ही दोषी अफसरों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कोर्ट ने इस मुठभेड़ को कोर्ट ने जहां एक ओर साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया है। धरनावदा थाना प्रभारी नरेन्द्र भार्गव ने स्वयं इस घटना की रिपोर्ट देहाती नालिसी दर्ज की थी, वहीं इस घटना के चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज कर प्रारंभिक विवेचना की थी।
घटना की सत्यता की तस्दीक करने आए थे मुखर्जी
इस मुठभेड़ के बाद तत्कालीन डीआईजी रूपसिंह मीणा ने चिलका पहाड़ी पर हुई मुठभेड़ की सत्यता के लिए शिवपुरी जिले के पोहरी के तत्कालीन एसडीओपी डा. एसएन मुखर्जी को गुना भेजा था। उन्होंने यहां आकर तत्कालीन थाना प्रभारी नरेन्द्र भार्गव द्वारा लिए गए ग्रामवासियों के बयान और पुलिस कर्मियों के बयान की सत्यता की तस्दीक कथन लिए थे। मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने इस घटना को लेकर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केसी जैन के बयान भी लेख किए थे। कोर्ट में इस मुठभेड़ में शामिल आधा दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों के भी बयान बदल गए हैं। जिससे कोर्ट ने बयानों को भी संदिग्ध माना है। एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि अभी आदेश नहीं आया है, जिसको पढऩे के बाद वैधानिक राय लेकर कार्रवाई की जाएगी।

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