आजादी का अमृत महोत्सव:दांडी यात्रा निकालकर गांधीजी ने तोड़ा था नमक कानून: द्विवेदी
अंग्रेजों का नमक कानून भारतीयों के लिए ज्यादती भरा था। इस वजह से महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा निकालकर नमक कानून तोड़ा।ताकि भारतीयों को अपने ही देश में नमक खाने अंग्रेजों के काले कानून का उल्लंघन न करना पडे। यह बात उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित हुई कार्यशाला के दौरान शिक्षाविद एमएस द्विवेदी ने आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित अमृत महोत्सव आयोजन में कही।
कार्यशाला के दौरान उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बहुत यातनाएं सही। उनके योगदान को हम भूलें नहीं।भारत वासियों को ब्रिटेन से आने वाले नमक को खरीदने के लिए विवश होना पड़ता था। गांधी जी ने नमक बनाकर अंग्रेजों के कानून को तोड़ा तथा भारतीयों में स्वतंत्रता के प्रति जोश भर दिया। एम एस द्विवेदी ने तात्या टोपे, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में भारत को स्वतंत्र कराने में दिए गए योगदान पर विस्तृत रूप से छात्र-छात्राओं को समझाया।
साथ ही शिवपुरी जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ राधेश्याम द्विवेदी, राम सिंह वशिष्ठ,वैध रतनचंद जैन, हरकिशन लाल खत्री, रामकृष्ण सिंघल,वेदेहीचरण पाराशर,पोहरी के गोपाल कृष्ण पुराणिक द्वारा देश के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान के बारे में छात्र-छात्राओं को विस्तृत रूप से समझाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के बाद विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना द्वारा किया।
छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए एम एस द्विवेदी ने दांडी यात्रा नमक सत्याग्रह के बारे में छात्रों को विस्तृत जानकारी दी। संस्था के छात्र हलचल सेन और सलोनी शर्मा ने भी स्वतंत्रता में भारतीयों के योगदान पर अपने विचार रखे गए। प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे अतिथि एम एस द्विवेदी के पिता डॉ राधेश्याम द्धिवेदी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। तथा मध्य प्रदेश के जाने-माने कानून के जानकार थे।
बड़े-बड़े मजिस्ट्रेट और वकील उनसे सलाह लेने उनके पास आते थे।उनके द्वारा लिखी गई किताबें आज भी वकालत के क्षेत्र में लोकप्रिय हैं। कार्यक्रम में डॉ रतीराम धाकड, हेमंत जैमिनी, दुर्गेश चौबे, प्रतिभा राठौड़, अनिल रावत, राकेश शर्मा, पीटीआई ताहिर अहमद, स्वाति बांझल, सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। संचालन राकेश कुलश्रेष्ठ ने किया।
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