A -- विज्ञान व गणित सहित अन्य विषय में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में नया विवाद
ग्वालियर सहित प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में हाई स्कूल व इंटर के लाखों छात्र इस सत्र में बिना शिक्षकों के ही क्लास रूम में पढ़ाई करेंगे। शिक्षक वर्ग-1 के 900 से ज्यादा मेरिट होल्डर के दस्तावेज संदिग्ध मिलने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया फिर अटक सकती है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को पचास हजार से अधिक पद रिक्त हैं। इनमें से तीस हजार हजार पद भरने के लिए प्रोफेशनल एक्जिमिनेशन बोर्ड ने वर्ष 2019 में लिखित परीक्षा कराई थी।
मेरिट में आए आवेदक दो साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष जुलाई से पहले 30 हजार शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी कर पदस्थापना करने की तैयारी कर रहा था लेकिन संदिग्ध दस्तावेजों के कारण इसमें और देर लग सकती है। दूसरी तरफ माध्यमिक शिक्षा मंडल हाई स्कूल की परीक्षा 30 अप्रैल व इंटर बोर्ड की परीक्षा एक मई से कराने जा रहे हैं। यदि शिक्षकों की जल्दी नियुक्ति हो जाती तो क्लास रूम में सबजेक्ट के विशेषज्ञ टीचर पढ़ाई कराते जिससे छात्रों को लाभ मिलता।
गौरतलब है कि डीपीआई ने पहले चरण में 15 हजार पद भरने के लिए 1 जुलाई 2020 से चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज का सत्यापन शुरू किया था। महज तीन दिन में करीब 58 सौ (करीब 49 फीसदी) लोगों का सत्यापन करने के बाद कोरोना का हवाला देकर प्रक्रिया रोक दी थी।
जिम्मेदार बोले- अपात्र आवेदकों काे बाहर और पात्र काे शामिल करेंगे^शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में करीब 900 लोगों के दस्तावेज सत्यापन को लेकर शिकायतें मिली हैं। हमने पांच लोगों की समिति बनाकर एक-एक आवेदक के कागजात का बारीकी से परीक्षण करने के आदेश दिए हैं। यदि इनमें कोई अपात्र होगा तो उसे बाहर किया जाएगा। कोई पात्र सूची में शामिल होने से छूटा गया है तो उसे शामिल किया जाएगा।- एसएसएच रिजवी, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संचालनालय
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