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उम्र 26-27 साल, लेकिन दे रहे बड़े प्रत्याशियों को टक्कर; कोई अभी पढ़ाई कर रहा है तो कोई छात्रसंघ अध्यक्ष है

बंगाल चुनाव में युवा प्रत्याशी उम्र 26-27 साल, लेकिन दे रहे बड़े प्रत्याशियों को टक्कर; कोई अभी पढ़ाई कर रहा है तो कोई छात्रसंघ अध्यक्ष है


वैशाली डालमिया BCCI और ICC के प्रेसिडेंट रह चुके जगमोहन डालमिया की बेटी हैं। इस बार वे हावड़ा की बाली सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

27 साल की आईशी, 28 साल की प्रथा भी मैदान में

लेफ्ट ने इस बार कई युवा चेहरों को कैंडिडेट बनाया है। जमुरिया सीट से लेफ्ट की उम्मीदवार 27 साल की आईशी घोष हैं। वे जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष हैं। साल 2020 में जब जेएनयू में हमलावर घुसे थे, तब आईशी की फोटोज खूब वायरल हुईं थीं। वे चोटिल भी हो गईं थीं और दीपिका पादुकोण ने जेएनयू पहुंचकर उनका समर्थन किया था। तब से ही आईशी सुर्खियों में हैं। पश्चिम बर्धमान जिले में आने वाली इसी सीट पर 2016 में भी सीपीआई-एम के जहांआरा खाना ही जीते थे। इस बार यहां आईशी का मुख्य मुकाबला टीएमसी के हरेराम सिंह के साथ दिख रहा है।

इसी तरह 28 साल की प्रथा ताह सीपीएम की दक्षिण बर्धमान से कैंडिडेट हैं। प्रथा के पिता भी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे। साल 2021 में उनकी हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगा था। पॉलिटिक्स ज्वॉइन करने के पहले प्रथा ने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। 37 साल की मीनाक्षी मुखर्जी को लेफ्ट ने नंदीग्राम से कैंडिडेट बनाया है। हालांकि यहां मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच ही है।


27 साल की आईशी घोष हैं जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष हैं। इस बार के चुनाव में आईशी जमुरिया सीट से लेफ्ट की उम्मीदवार हैं।

सीपीएम ने 27 साल के सृजन भट्टाचार्य को सिंगुर से कैंडिडेट बनाया है। वे कहते हैं, मेरी लड़ाई किसी कैंडीडेट के खिलाफ नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार, कटमनी के खिलाफ है। लेफ्ट नेता शंकर मोइत्रा कहते हैं, पार्टी ने अचानक किसी युवा को टिकट नहीं दिया बल्कि ये सब वो लोग हैं, जो पिछले कई सालों से जमीनी आंदोलनों से जुड़े हुए हैं और सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं। इनकी अपनी आइडियोलॉजी है और ये देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। इसलिए इन्हें मौका दिया गया है।


 

सीपीआई-एम लीडर शंकर मोइत्रा कहते हैं, पार्टी ने किसी भी युवा को अचानक कैंडिडेट नहीं बनाया। जो भी कैंडिडेट बनाए गए हैं, वे वो युवा हैं जो बीते दस सालों से जमीनी राजनीति में एक्टिव हैं और युवाओं के लिए आंदोलन कर रहे थे। दीप्सिता कहती हैं, हमें जीतने का तो पूरा कॉन्फिडेंस है, लेकिन डर पोलिंग वाले दिन हिंसा होने का है। टीएमसी और बीजेपी दोनों ही हिंसा करवा सकती हैं, क्योंकि बाली में उनकी स्थिति ठीक नहीं है।

लेखक: अक्षय बाजपेयी जी

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