सरकार को नक्सलियों की चुनौती: संदेश नक्सली हमले के बाद बंधक बनाए गए कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह की रिहाई और इसके तरीके में छिपे अहम
रिहाई से ज्यादा इसका तरीका हैरान करने वाला
नक्सलियों ने कैसे बनाई मनोवैज्ञानिक बढ़त
- अपहरण के बाद 4 अप्रैल को नक्सलियों ने खुद ही मीडिया को फोन कर बताया कि उन्होंने ही जवान का अपहरण किया है। उन्होंने साफ कहा कि कमांडो सुरक्षित है और वे जल्द ही उसकी बिना शर्त रिहाई कर देंगे। नक्सलियों ने ऐसा कहकर हाई मोरल ग्राउंड अपनाने की कोशिश की। ऐसा करके नक्सलियों की यह दिखाने की कोशिश हो सकती है कि उनकी दुश्मनी जवानों से नहीं, बल्कि सरकार से है।
- इसके बाद ज्यादा से ज्यादा पब्लिसिटी पाने के लिए नक्सलियों ने यह ऐलान किया कि सरकार कमांडो की रिहाई के लिए मध्यस्थों के नाम घोषित करे।
- कमांडो की रिहाई नक्सलियों ने बिना ज्यादा देर लगाए, और सरकार के लिए बहुत ज्यादा मजबूर हालात ना बनाते हुए कर दी, ताकि उन्हें गुडविल मिल सके।
- जिस तरह से जन अदालत लगाकर हजारों आदिवासियों की भीड़ के सामने कमांडो की रस्सियों से मुस्कें बांधकर रिहा किया गया, उससे भी नक्सलियों ने ऐसा संदेश देने की कोशिश की है कि अपने कोर इलाके में उन्हें सरकार का कोई डर नहीं है। उन्हें सरकार की निर्णायक लड़ाई की धमकी का भी कोई डर नहीं है।
- ऐसा करके उन्होंने न सिर्फ देश की संप्रभुता को ललकारा, बल्कि केंद्र सरकार की छवि को भी काफी हद तक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है।




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